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अपराजिता आढ्य बोलीं काम के लालच में होती तो कभी बेरोजगार नहीं रहती'

टॉलीवुड अभिनेत्री अपराजिता आढ्य ने अरूप विश्वास को भाईदूज देने पर हो रही ट्रोलिंग का करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि शिष्टाचार को राजनीतिक समर्थन से जोड़ना गलत है
अपराजिता आढ्य बोलीं काम के लालच में होती तो कभी बेरोजगार नहीं रहती'

​टॉलीवुड (बंगाली फिल्म उद्योग) की जानी-मानी अभिनेत्री अपরাজिता आढ্য (Aparajita Adhya) इन दिनों सोशल मीडिया पर तीखे हमलों और ट्रोलिंग का सामना कर रही हैं। फेडरेशन के पूर्व अध्यक्ष स्वरूप विश्वास की हालिया गिरफ्तारी के बाद, सोशल मीडिया पर टॉलीवुड अभिनेत्रियों के पुराने वीडियो और तस्वीरें वायरल की जा रही हैं। इनमें अपরাজिता आढ্য द्वारा पूर्व मंत्री अरूप विश्वास को भाईदूज (Bhaiphota) के अवसर पर टीका लगाने का एक पुराना वीडियो भी शामिल है, जिसे लेकर नेटिजन्स उन पर "काम के लालच में मंत्रियों के करीब रहने" का आरोप लगा रहे हैं।

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लगातार हो रही इस ट्रोलिंग और अभद्र टिप्पणियों से व्यथित होकर अभिनेत्री ने एक वीडियो संदेश के जरिए ट्रोलर्स को आड़े हाथों लिया है। अपরাজिता ने स्पष्ट किया कि किसी राजनीतिक पद या रसूखदार व्यक्ति को सम्मान देना "सौजन्य और शिष्टाचार" (Political Courtesy) का हिस्सा है, इसका मतलब उस व्यक्ति की विचारधारा या गतिविधियों का अंधसमर्थन करना नहीं होता।

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"सौजन्य और समर्थन में अंतर होता है": अपরাজिता का कड़ा रुख

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वीडियो संदेश में अभिनेत्री ने 'सौजन्य' शब्द के गायब होते महत्व पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आज के समाज में लोग शिष्टाचार और राजनीतिक समर्थन के बीच का अंतर भूलते जा रहे हैं। अपরাজिता ने ट्रोलर्स को जवाब देते हुए कहा:

"अगर हर कोई काम के लालच में मंत्रियों के करीब जाता, तो आज तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद शताब्दी रॉय हर बंगाली फिल्म की मुख्य अभिनेत्री होतीं, क्योंकि वह कई वर्षों से सांसद हैं। हम बड़े-बुजुर्गों से शिष्टाचार सीखकर बड़े हुए हैं। अगर कोई ताकतवर व्यक्ति या मुख्यमंत्री हमें आमंत्रित करता है, तो वहां जाना हमारा सामाजिक कर्तव्य है। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि हम उनके हर कृत्य का समर्थन कर रहे हैं।"

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उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा आयोजित विजया दशमी (दुर्गा पूजा कार्निवल) के कार्यक्रमों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पंडित अजय चक्रवर्ती, राशिद खान और उषा उत्थुप जैसे महान कलाकार शामिल होते थे। उन दिग्गजों को किसी से कुछ पाने का लालच नहीं था; वे केवल पद और निमंत्रण का सम्मान करने वहां जाते थे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भविष्य में यदि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी या उनका कोई मंत्री भी उन्हें आमंत्रित करेगा, तो वह शिष्टाचार के नाते वहां भी जरूर जाएंगी।

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टॉलीवुड में 'ব্যান' (Ban) संस्कृति और अंदरूनी सिस्टम पर उठाया सवाल

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जब सोशल मीडिया यूजर्स ने उन पर आरोप लगाया कि उन्होंने पहले फेडरेशन और स्वरूप विश्वास की मनमानियों के खिलाफ आवाज क्यों नहीं उठाई, तो अपরাজिता ने फिल्म उद्योग के भीतर चल रहे 'बैन संस्कृति' के कुछ अनसुने पहलुओं को उजागर किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि हर विरोध सड़कों पर उतरकर या हिंसक होकर नहीं किया जाता, बल्कि रणनीतिक रूप से किया जाता है।

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अपরাজिता ने टॉलीवुड की अंदरूनी कड़वी सच्चाई साझा करते हुए दो प्रमुख उदाहरण दिए:

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  • अनिर्बान भट्टाचार्य का मामला: जब अभिनेता अनिर्बान ভট্টাচার্য (Anirban Bhattacharya) को अनौपचारिक रूप से बैन करने की कोशिश की जा रही थी, तब सुपरस्टार देव (Dev) ने अपनी फिल्म 'देशु 7' (Deshu 7) में उन्हें कास्ट करने का साहस दिखाया था। देव ने काम शुरू करने से पहले अपরাজিতা, कंचन मुलिक और प्रदीप मामा से पूछा था कि क्या वे बैन होने के जोखिम के बावजूद इस फिल्म का हिस्सा बनेंगे? अपরাজिता ने बिना किसी डर के तुरंत हां कहा था। अभिनेत्री के अनुसार, यह फिल्म उद्योग के गलत सिस्टम के खिलाफ उनका सीधा विरोध था।
  • प्रसेनजीत चटर्जी का रुख: अभिनेता राहुल अरुणोदय बनर्जी की आकस्मिक मृत्यु के बाद जब टॉलीवुड के इस दमनकारी रवैये के खिलाफ आवाजें उठीं, तो प्रসেনजीत चटर्जी (Prosenjit Chatterjee) जैसे वरिष्ठ अभिनेता को भी पीछे हटना पड़ा था। अपরাজिता ने कहा कि प्रসেনजीत शिक्षित और समझदार हैं, वे जानते थे कि उस समय स्थितियां ऐसी थीं कि चाहकर भी व्यवस्था को तुरंत नहीं बदला जा सकता था, क्योंकि सभी पर अदृश्य 'दबाव' था।

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वर्तमान में सौरव गांगुली की बायोपिक फिल्म 'দাদা' (Dada) में उनकी मां निरूपा गांगुली की भूमिका निभा रहीं अपরাজिता ने अपने संघर्ष को बयां करते हुए कहा, "इस फिल्म से पहले मैं छह महीने बिना काम के घर बैठी थी। अगर मैं मंत्रियों की इतनी ही करीबी होती और काम के लालच में उनके पास जाती, तो मुझे छह महीने बिना काम के क्यों बैठना पड़ता?"

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अभिनेत्री रणिता दास का समर्थन: "कर्मफल तो भुगतना ही होगा"

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इस पूरे विवाद के बीच टॉलीवुड की एक और प्रमुख अभिनेत्री रणिता दास (Ranita Das) ने भी अरूप विश्वास को भाईदूज देने के मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। रणिता ने भी अतीत में अरूप विश्वास को भाईदूज का टीका लगाया था, लेकिन स्वरूप विश्वास की गिरफ्तारी के बाद उनके रुख में भी स्पष्टता दिखी।

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रणিতা दास ने अरूप विश्वास के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों और प्रशासनिक कार्रवाई पर खुलकर बात की:

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पक्ष (Aspect) रणिता दास का आधिकारिक वक्तव्य / अनुभव
अरूप विश्वास के प्रति दृष्टिकोण रणिता ने बताया कि वैश्विक महामारी (Covid-19) के दौरान जब उनके माता-पिता अत्यंत गंभीर स्थिति में थे और कहीं भी बेड उपलब्ध नहीं था, तब अरूप विश्वास ने एक बड़े भाई की तरह उनकी मदद की थी। वह उस मानवीय ऋण को कभी नहीं भूल सकतीं और वह भाईदूज राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत कृतज्ञता और दिल से देती थीं।
स्वरूप विश्वास की गिरफ्तारी पर रुख कानूनी कार्रवाई का समर्थन करते हुए रणिता ने साफ कहा, "जिसने भी गलत किया है, उसे अपना कर्मफल भुगतना ही होगा (कर्मफल भोग करतेई हवे)। भ्रष्टाचार, उगाही या जबरन वसूली के मामलों में फिल्म उद्योग के सभी कलाकारों का मत एक है।"
टॉलीवुड बैन संस्कृति का विरोध रणिता ने भी टॉलीवुड में चल रहे सिंडिकेट राज की निंदा करते हुए कहा कि किसी भी कलाकार का काम छीन लेना या उसे बैन कर देना सबसे घटिया कृत्य है। अनिर्बान भट्टाचार्य के साथ जो हुआ, वह पूरी तरह गलत था। उन्होंने स्वीकार किया कि उनके खुद के कई बुरे अनुभव रहे हैं।

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राजनीतिक घमासान और कानूनी नोटिस

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यह पूरा विवाद केवल सोशल मीडिया ट्रोलिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे पश्चिम बंगाल की मौजूदा गरमाई हुई राजनीति भी जिम्मेदार है। जबरन वसूली (तोलाबाजी) और श্লীলता भंग करने के आरोपों में घिरे पूर्व मंत्री अरूप विश्वास के भाई स्वरूप विश्वास पहले ही पुलिस हिरासत में हैं। वहीं, खुद अरूप विश्वास भी कानूनी शिकंजे में फंसते नजर आ रहे हैं।

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बिधाननगर दक्षिण पुलिस स्टेशन ने मेसिकांड (Mess Incident) और जबरन वसूली की लिखित शिकायत के आधार पर अरूप विश्वास को 4 जून को पूछताछ के लिए उपस्थित होने का नोटिस जारी किया था, जिसे उन्होंने अस्वस्थता का हवाला देकर टाल दिया था। इसके बाद राज्य पुलिस ने उनके न्यू अलीपुर स्थित आवास के दरवाजे पर दो नए नोटिस चिपकाए हैं, जिसमें उन्हें सोमवार सुबह 11 बजे तक थाने में हाजिर होने का अंतिम निर्देश दिया गया है। पुलिस ने संकेत दिया है कि यदि वह इस बार भी उपस्थित नहीं होते हैं, तो उनके खिलाफ गिरफ्तारी सहित कड़े कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं।

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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे राज्य में प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाइयां तेज हो रही हैं, वैसे-वैसे कलाकारों पर भी राजनीतिक दलों के साथ उनके पुराने संबंधों को लेकर सामाजिक दबाव बढ़ता जा रहा है। अपরাজिता আঢ্য ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इन लगातार होने वाले मानसिक हमलों को और बर्दाश्त नहीं करेंगी और इस विषय में महिला एवं बाल कल्याण मंत्री अग्निमित्रा पॉल (Agnimitra Paul) के पास आधिकारिक शिकायत दर्ज कराएंगी।

Delhi Desk

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