DU Fee Hike: डीयू में पढ़ाई हुई इतनी महंगी? 425% फीस बढ़ते ही सर्टिफिकेट से लेकर रिसर्च कोर्सेज से दूर हो गए छात्र
छात्रों ने कहा-फीस वृद्धि से पढ़ाई होगी प्रभावित
दिल्ली डेस्क, 25 जून 2026
दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए लागू किए गए नए फीस ढांचे ने उच्च शिक्षा की बढ़ती लागत पर छात्रों की परेशानी को काफी बढ़ा दिया है। इस साल लागू हुए DU Fee Hike के कारण विश्वविद्यालय के कई सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, स्नातकोत्तर (PG) और शोध (Ph.D) पाठ्यक्रमों की फीस में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। इस अचानक हुए आर्थिक बोझ का सबसे अधिक असर उन छात्र-छात्राओं पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है, जो आर्थिक रूप से कमजोर या मध्यम वर्गीय परिवारों से आते हैं। शिक्षकों और विभिन्न छात्र संगठनों का साफ कहना है कि इस बड़े DU Fee Hike से दाखिलों की संख्या गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है और कई होनहार छात्र उच्च शिक्षा से पूरी तरह दूर हो सकते हैं।
DU Fee Hike का पूरा गणित: उर्दू कोर्सेज में 425% की रिकॉर्ड बढ़ोतरी
विश्वविद्यालय द्वारा जारी किए गए नए ढांचे के अनुसार, सबसे बड़ी बढ़ोतरी भाषा से जुड़े पाठ्यक्रमों में देखी गई है। इस DU Fee Hike के बाद उर्दू के सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और एडवांस डिप्लोमा पाठ्यक्रमों की फीस को 1,372 रुपये से सीधे बढ़ाकर 7,200 रुपये कर दिया गया है, जो करीब 425 प्रतिशत की रिकॉर्ड वृद्धि है। केवल सर्टिफिकेट ही नहीं, बल्कि एमए (उर्दू) की फीस भी लगातार बढ़ रही है और पिछले दो वर्षों में इसमें लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जा चुकी है। इसके अलावा, उच्च शिक्षा और रिसर्च से जुड़े पीएचडी (Ph.D) कार्यक्रम की फीस में भी 600 रुपये की बढ़ोतरी लागू कर दी गई है।
यूनिवर्सिटी फैसिलिटीज एंड सर्विसेज चार्ज बढ़ने से बढ़ा बोझ
फीस वृद्धि की यह मार केवल भाषा विभागों तक सीमित नहीं है। मास मीडिया और पैलियोग्राफी जैसे प्रोफेशनल व तकनीकी पाठ्यक्रम भी इस DU Fee Hike से अछूते नहीं रहे हैं। नए ढांचे में मास मीडिया कोर्स की फीस में 140 प्रतिशत से अधिक और पैलियोग्राफी पाठ्यक्रम में लगभग 200 प्रतिशत तक की भारी वृद्धि की गई है।
इस मामले पर विश्वविद्यालय के शिक्षकों का कहना है कि वास्तव में मूल ट्यूशन फीस में कोई बहुत बड़ी बढ़ोतरी नहीं की गई है, बल्कि 'यूनिवर्सिटी फैसिलिटीज एंड सर्विसेज चार्ज' (विश्वविद्यालय सुविधाएं और सेवा शुल्क) तथा 'विभागीय सर्विस चार्ज' के मद में की गई भारी वृद्धि के कारण छात्रों पर कुल आर्थिक बोझ अचानक कई गुना बढ़ गया है।
आवेदन के बाद भी प्रवेश लेने से पीछे हट रहे हैं छात्र
विश्वविद्यालय से जुड़े आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस अप्रत्याशित DU Fee Hike का सीधा नकारात्मक असर अब डीयू की चालू प्रवेश प्रक्रिया (Admission Process) पर भी दिखाई देने लगा है। कई छात्रों ने दाखिले के लिए आवेदन तो किया था, लेकिन जब उनके सामने बढ़ा हुआ फीस ढांचा आया, तो उन्होंने दाखिला लेने से अपने हाथ पीछे खींच लिए।
शिक्षकों का तर्क है कि विशेष रूप से डिप्लोमा और एडवांस डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के छात्रों को विश्वविद्यालय परिसर की अधिकांश मुख्य सुविधाओं का पूरा लाभ वैसे भी नहीं मिलता है। ऐसे में उन पर इस तरह का अतिरिक्त और भारी शुल्क का बोझ डालना किसी भी तरह से तर्कसंगत या उचित नहीं माना जा सकता।
DU Fee Hike: प्रमुख कोर्सेज का नया फीस ढांचा (2026-27)
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पाठ्यक्रम / कोर्स का नाम (Course Name) |
पुरानी फीस (Old Fee) |
नई वार्षिक फीस (New Fee) |
कुल बढ़ोतरी (Percentage Hike) |
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उर्दू सर्टिफिकेट कोर्स |
₹1,372 |
₹7,200 |
425% |
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उर्दू डिप्लोमा कोर्स |
₹1,372 |
₹7,200 |
425% |
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उर्दू एडवांस डिप्लोमा |
₹1,372 |
₹7,200 |
425% |
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पैलियोग्राफी पाठ्यक्रम |
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~200% |
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मास मीडिया कोर्स |
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140%+ |
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20% (2 वर्षों में) |
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पीएचडी कार्यक्रम (Ph.D) |
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₹600 अतिरिक्त |
बढ़ोतरी लागू |
कम पढ़ाई और कम सुविधाओं के बीच 7,200 रुपये की फीस अनुचित
विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि एडवांस डिप्लोमा जैसे पार्ट-टाइम या शॉर्ट-टर्म पाठ्यक्रमों के छात्रों को नियमित (Regular) छात्रों की तरह विश्वविद्यालय की अधिकांश सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पाती हैं। उदाहरण के तौर पर, इस कोर्स की कक्षाएं सप्ताह में पांच दिन सुबह 8:00 बजे से 9:30 बजे तक चलती हैं, यानी प्रतिदिन केवल डेढ़ घंटे की ही पढ़ाई होती है। इन छात्रों को नियमित छात्र-छात्राओं की तरह पुस्तकालय (Library) और अन्य कई महत्वपूर्ण कैंपस सुविधाओं का पूरा लाभ उठाने का अवसर भी नहीं मिलता। ऐसे सीमित संसाधनों के बीच 7,200 रुपये की भारी-भरकम फीस वसूलने को छात्र पूरी तरह से अनुचित और अन्यायपूर्ण मान रहे हैं।
इस बड़े DU Fee Hike की तत्काल समीक्षा करने की उठ रही है मांग
विभागों और संकायों से जुड़े लोगों का स्पष्ट कहना है कि फीस वृद्धि का मुख्य कारण 'यूनिवर्सिटी फैसिलिटीज एंड सर्विसेज चार्ज' और 'फैकल्टी, डिपार्टमेंट, सेंटर अथवा कॉलेज फैसिलिटीज एंड सर्विसेज चार्ज' में की गई बढ़ोतरी ही है। इसके विरोध में अब विभिन्न शिक्षक और छात्र समूहों ने इन शुल्कों की तत्काल प्रभाव से समीक्षा करने और इन्हें वापस लेने या कम करने की पुरजोर मांग की है।
उर्दू विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर अबूबकर अबाद ने इस गंभीर विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कई महत्वपूर्ण पाठ्यक्रमों की फीस में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है और इस पूरे मुद्दे को विभागीय परिषद (Departmental Council) की बैठक में प्रमुखता से उठाया गया है। विभाग इस संबंध में जल्द ही विश्वविद्यालय प्रशासन को एक आधिकारिक पत्र भेजेगा। दूसरी ओर, विभिन्न छात्र संगठनों ने इस कदम की तीखी आलोचना करते हुए इसे शिक्षा के बढ़ते व्यावसायीकरण (Commercialization of Education) से जोड़ा है और इस DU Fee Hike को तुरंत रोलबैक (वापस) करने के लिए आंदोलन की चेतावनी दी है।