Delhi Police AHTU Success: किसी को पढ़ने की जिद तो कोई भूला रास्ता, दिल्ली पुलिस ने ऐसे बचाईं 5 मासूम जिंदगियां, परिवारों में लौटीं खुशियां
दुनिया के सामने आया खाकी का मानवीय और संवेदनशील चेहरा
दिल्ली डेस्क, 23 जून 2026
Delhi Police AHTU Success: अपनों से बिछड़ जाने का गम क्या होता है, इसे केवल वही परिवार समझ सकता है जिसने इस दर्द को झेला हो। लेकिन जब कोई फरिश्ता बनकर इन बिखरे परिवारों को दोबारा मिला दे, तो वह पल बेहद भावुक कर देने वाला होता है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के तहत काम करने वाली एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) ने एक बार फिर खाकी के मानवीय और संवेदनशील चेहरे को दुनिया के सामने पेश किया है। एएचटीयू की टीमों ने दिल्ली और हरियाणा के अलग-अलग इलाकों में ताबड़तोड़ ऑपरेशन्स चलाते हुए चार लापता नाबालिग बच्चों और एक दिव्यांग महिला को सुरक्षित ढूंढ निकाला है। इनमें से दो मामलों में तो पुलिस ने महज 24 घंटे के भीतर ही लापता लोगों को उनके परिजनों के हवाले कर दिया।
खेल-खेल में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचे दो सगे मासूम भाई
लापता बच्चों की तलाश में जुटी पुलिस टीम के सामने सबसे पहली और बड़ी चुनौती हजरत निजामुद्दीन इलाके से लापता हुए दो सगे भाइयों की थी, जिनकी उम्र महज 10 साल और 6 साल थी। ये दोनों बच्चे 10 जून 2026 को घर के बाहर खेलते-खेलते अचानक रास्ता भटक गए थे। भटकते हुए दोनों मासूम नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर जा पहुंचे। गनीमत यह रही कि वहां मुस्तैद पुलिस कर्मियों की नजर इन लावारिस घूमते बच्चों पर पड़ गई, जिसके बाद उन्हें सुरक्षित कस्टडी में लेकर पहाड़गंज के साथी चिल्ड्रेन होम भेज दिया गया। इधर एएचटीयू के इंस्पेक्टर मुकेश कुमार और एएसआई अजय कुमार झा की टीम ने तकनीकी कड़ियों को जोड़ते हुए चिल्ड्रेन होम में इन बच्चों को लोकेट किया और कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर इन्हें इनके माता-पिता से मिलवाया।
दवा छूटने से रास्ता भूली दिव्यांग महिला, 24 घंटे में मिली
एक दूसरा बेहद संवेदनशील मामला स्वरूप नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ था, जहां 45 साल की एक दिव्यांग महिला 11 जून 2026 को अचानक गायब हो गई थी। महिला मानसिक रूप से अस्वस्थ थी और पिछले कुछ दिनों से उसकी दवाइयां भी छूट गई थीं। वह अपने घर से बहन से मिलने के लिए निकली थी लेकिन रास्ते में पूरी तरह से दिशाहीन हो गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए एएचटीयू की टीम ने एएसआई अजय कुमार झा के नेतृत्व में तुरंत मैनुअल इनपुट्स और टेक्निकल सर्विलांस का जाल बिछाया। पुलिस टीम ने महिला के भाई को साथ लिया और गायब होने के महज 24 घंटे के भीतर ही महिला को मंदिर मार्ग बस स्टैंड से सकुशल बरामद कर लिया।
पढ़ने की चाहत में अंकल से हुआ विवाद, गुस्से में घर छोड़ हरियाणा भागा 15 साल का छात्र
इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन में बवाना इलाके के रहने वाले एक 15 साल के बच्चे की कहानी ने पुलिसकर्मियों को भी भावुक कर दिया। यह बच्चा 13 जून 2026 से लापता था। इंस्पेक्टर मनोज दहिया के नेतृत्व में जब पुलिस टीम ने सर्विलांस के जरिए बच्चे को हरियाणा के सोनीपत से बरामद किया, तो काउंसलिंग के दौरान एक चौंकाने वाली बात सामने आई। बच्चे ने बताया कि उसके पिता का करीब 9-10 साल पहले निधन हो चुका था और मां की दूसरी शादी के बाद वह पिछले 8 सालों से अपने ताऊ के साथ रह रहा था। उसने हाल ही में 10वीं कक्षा की परीक्षा पास की थी और वह आगे पढ़ाई जारी रखना चाहता था। लेकिन उसके ताऊ पढ़ाई का खर्च उठाने और उसे आगे पढ़ाने के लिए तैयार नहीं थे। इसी बात से आहत होकर वह गुस्से में घर छोड़कर भाग गया था। पुलिस ने बच्चे की काउंसलिंग कर उसे सुरक्षित परिवार को सौंप दिया है।
बिहार से इलाज के लिए दिल्ली आया था 7 साल का मासूम
एक अन्य मामले में आरके पुरम इलाके से लापता हुआ एक 7 साल का मासूम बच्चा भी एएचटीयू की मुस्तैदी के कारण अपने पिता की गोद में वापस लौट सका। यह मासूम मानसिक बीमारी से पीड़ित था, जिसे उसके माता-पिता बिहार से दिल्ली इलाज कराने के लिए लेकर आए थे। 20 जून 2026 को घर के बाहर खेलते हुए वह रास्ता भूल गया। पुलिस टीम ने सोशल मीडिया और वाट्सऐप ग्रुप्स पर आए मैसेज और जिपनेट (ZIPNET) पोर्टल पर उपलब्ध डेटा का बारीकी से मिलान किया। बच्चे का हुलिया मैच होते ही पुलिस ने उसके पिता को वाट्सऐप पर फोटो भेजी, जिसने तुरंत अपने जिगर के टुकड़े को पहचान लिया। इसके बाद पुलिस ने सीडब्ल्यूसी लाजपत नगर से बच्चे को रेस्क्यू कर उसके पिता को सौंप दिया। स्पेशल कमिश्नर (क्राइम) एच.जी.एस. धलीवाल ने पूरी टीम की इस मानवीय सफलता की सराहना करते हुए कहा है कि दिल्ली पुलिस हर लापता शिकायत पर पूरी संवेदनशीलता और मुस्तैदी से काम करती है।