दिल्ली भाजपा ने आपातकाल 1975 पर आयोजित सेमिनार में 115 लोकतंत्र सेनानियों का किया अभिनंदन
भाजपा ने 'संविधान हत्या दिवस' पर कांग्रेस की तानाशाही पर किया जमकर हमला
दिल्ली डेस्क, 26 जून 2026
दिल्ली भाजपा ने देश में 1975 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल (इमरजेंसी) के विरोध में एन.डी.एम.सी. कन्वेंशन सेंटर में एक विशाल सेमिनार का आयोजन किया। प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में उस काले दौर के दौरान जेल गए 115 लोकतंत्र सेनानियों का अभिनंदन किया गया।
26 जून को आयोजित इस सेमिनार में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और वरिष्ठ नेता सत्यनारायण मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। सभी नेताओं ने एक सुर में युवाओं को इतिहास के इस काले अध्याय से अवगत कराने और आज संविधान की दुहाई देने वाली कांग्रेस की तत्कालीन मानसिकता को बेनकाब करने की जरूरत पर जोर दिया।
दिल्ली भाजपा के इस विशेष सेमिनार का मुख्य उद्देश्य क्या था?
दिल्ली भाजपा ने आपातकाल 1975 को 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में याद करते हुए 115 लोकतंत्र सेनानियों का अभिनंदन किया। इसका उद्देश्य आज की युवा पीढ़ी को यह याद दिलाना है कि कैसे तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने सत्ता के अहंकार में लोकतंत्र का गला घोंटा था, ताकि भविष्य में कोई नेता ऐसा दुस्साहस न कर सके।
सेमिनार के मुख्य बिंदु और वरिष्ठ सेनानियों का सम्मान
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा की अध्यक्षता में आयोजित इस सेमिनार को संचालित करने की जिम्मेदारी सांसद योगेन्द्र चांदोलिया, धर्मवीर शर्मा और देवेन्द्र सोलंकी की कमेटी ने निभाई। कार्यक्रम में देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को बचाने के लिए जेल जाने वाले कई दिग्गज लोकतंत्र सेनानियों को शॉल पहनाकर और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
सम्मानित किए गए प्रमुख लोकतंत्र सेनानी:
- ओ.पी. बब्बर और नंदकिशोर गर्ग
- लालबिहारी तिवारी और पी.के. चांदला
- सुरेश गुप्ता, रामभज और करणसिंह तंवर
- श्रवण कुमार, तिलकराज कटारिया, संजय भाटिया, राजन ढींगरा और जगमल प्रसाद।
कार्यक्रम में सांसद मनोज तिवारी, रामवीर सिंह बिधूड़ी, बाँसुरी स्वराज और दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद ने भी शिरकत कर सेनानियों का आशीर्वाद लिया।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और स्मृति ईरानी ने कांग्रेस पर किए तीखे प्रहार
रेखा गुप्ता ने आपातकाल की तुलना रावण दहन से करते हुए इसे असत्य पर सत्य की जीत की याद दिलाने वाला दिन बताया। उन्होंने कहा कि आज जो लोग जेब में संविधान लेकर घूमते हैं और यह नाटक करते हैं कि लोकतंत्र खतरे में है, वे दरअसल उन लाखों सेनानियों का अपमान कर रहे हैं जिन्होंने जेलों में अमानवीय यातनाएं सहीं। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे अटल बिहारी वाजपेयी जी ने जेल में रहकर भी अपनी लेखनी से देश की आवाज बुलंद रखी और जयप्रकाश नारायण को लोहे की जंजीरों में जकड़ने के बाद भी उनके हौसले को नहीं तोड़ा जा सका।
पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने आपातकाल के दौरान हुए अत्याचारों के उन पन्नों को खोला जिन्हें इतिहास से गायब करने की कोशिश की गई:
- महिलाओं पर अत्याचार: स्मृति ईरानी ने भावुक होते हुए कहा कि आपातकाल में महिलाओं के साथ क्या-क्या हुआ, इसका इतिहास में जिक्र तक नहीं है।
- जबरन नसबंदी का खौफ: उन्होंने बताया कि उस दौर में 1 करोड़ से ज्यादा लोगों की जबरन नसबंदी की गई। एक गांव ने विरोध किया तो 26 दिनों तक बिजली काटकर वहां के मर्दों को पकड़कर जबरन नसबंदी कर दी गई।
- न्यायपालिका और ब्यूरोक्रेसी को बंधक बनाना: इंदिरा गांधी के चुनाव को जब अदालत में चुनौती दी गई, तो उन्होंने न्यायपालिका की अवहेलना की और आपातकाल का हिस्सा न बनने वाले 25,000 ईमानदार अधिकारियों को जबरन समय से पहले रिटायर कर दिया।
लोकतंत्र के मजबूत स्तंभ और जनता का अंतिम निर्णय
केंद्रीय राज्य मंत्री और प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि आज देश 'संविधान हत्या दिवस' का 51वां वर्ष देख रहा है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे इस बात को समझें कि कैसे प्रेस की आजादी छीनी गई थी और नागरिकों के अधिकार कुचले गए थे। उन्होंने कहा कि भाजपा आज 22 राज्यों में सरकार चला रही है, लेकिन इसकी भव्य इमारत इन्हीं लोकतंत्र सेनानियों के तप और त्याग पर टिकी है।
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लोकतंत्र के 4 सबसे मजबूत स्तंभ (हर्ष मल्होत्रा के अनुसार) |
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1. स्वतंत्र न्यायपालिका (Independent Judiciary) |
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2. स्वतंत्र प्रेस (Free Press) |
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3. सक्रिय नागरिक समाज (Active Civil Society) |
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4. जागरूक जनता (Aware Public) |
"सत्ता कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंत में लोकतंत्र में अंतिम निर्णय जनता का ही होता है। आज की पीढ़ी को याद रखना चाहिए कि लोकतंत्र की रक्षा केवल कागजों पर लिखे संविधान से नहीं, बल्कि सजग नागरिकों और लोकतंत्र के प्रहरियों के संघर्ष से होती है।" — सत्यनारायण जटिया
FAQ
प्रश्न 1: दिल्ली भाजपा ने 26 जून को किस कार्यक्रम का आयोजन किया?
उत्तर: दिल्ली भाजपा ने एन.डी.एम.सी. कन्वेंशन सेंटर में 1975 के आपातकाल के खिलाफ एक सेमिनार आयोजित किया, जिसमें आपातकाल के दौरान जेल गए 115 लोकतंत्र सेनानियों का अभिनंदन किया गया।
प्रश्न 2: बीजेपी हर साल 25 जून को 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में क्यों याद करती है?
उत्तर: 25 जून 1975 को देश में लगाए गए आपातकाल के दौरान नागरिक अधिकारों को छीनने, प्रेस पर सेंसरशिप लगाने और लोकतंत्र की हत्या किए जाने के काले इतिहास को याद रखने और युवा पीढ़ी को जागरूक करने के लिए इसे याद किया जाता है।
प्रश्न 3: स्मृति ईरानी ने आपातकाल के दौरान तानाशाही के क्या उदाहरण दिए?
उत्तर: स्मृति ईरानी ने 1 करोड़ से अधिक लोगों की जबरन नसबंदी, विरोध करने वाले गांवों की बिजली काटने, आपातकाल का विरोध करने वाले 25,000 अधिकारियों को जबरन रिटायर करने और जॉर्ज फर्नांडिस को ढूंढने के लिए उनके भाई की हत्या जैसे भयावह उदाहरण दिए।