Delhi Police criminal cases: आरटीआई से हुआ चौकानें वाला खुलासा, हर 100 में से एक जवान पर क्रिमिनल केस
52 पुलिसकर्मियों के खिलाफ दुष्कर्म सरीखे गंभीर आरोप
दिल्ली डेस्क, 16 जून 2026
दिल्लीवालों की जिम्मेदारी का जिम्मा जिस खाकी पर है वो दागदार होती जा रही है। हाल ही में सूचना का अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में एक बहुत बड़ा खुलासा हुआ है। हिंदुस्तान लाइव की एक रिपोर्ट में उस RTI का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि करीब 80 हजार से अधिक के पुलिस बल वाली Delhi Police Criminal Cases के जाल में फंस चुकी है, जहां बल का हर 100 में से एक जवान आपराधिक मामलों में आरोपी पाया गया है।
यह चिंताजनक खुलासा दिल्ली के जाने-माने वकील गौरव भारद्वाज द्वारा 28 अप्रैल को दायर की गई एक आरटीआई के आधिकारिक जवाब से हुआ है। इस रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2020 से लेकर मई 2026 के बीच, यानी पिछले साढ़े पांच सालों के भीतर कुल 925 पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए हैं। सबसे ज्यादा विचलित करने वाली बात यह है कि इसी फोर्स के 52 पुलिस कर्मियों पर दुष्कर्म जैसे बेहद संगीन और घिनौने आरोपों के तहत एफआईआर दर्ज है।
मीडिया रिपोर्ट की मानें तो दिल्ली पुलिस की थर्ड बटालियन, जो कैदियों को तिहाड़ और अन्य जेलों से सुरक्षित अदालत ले जाने का काम करती है, वहां सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे नजर आ रही है। इस विशिष्ट विडिंग में दुष्कर्म के 14 आरोपी जवान मौजूदा समय में तैनात हैं। इतना ही नहीं, इसी अकेले यूनिट में 136 ऐसे पुलिसकर्मी भी अपनी ड्यूटी दे रहे हैं, जिनके खिलाफ अलग-अलग अदालतों में Delhi Police Criminal Cases के तहत आपराधिक मुकदमे लंबित हैं।
इस पूरे मामले का दूसरा और सबसे हैरान करने वाला पहलू न्यायिक और जांच प्रक्रिया है। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साढ़े पांच वर्षों में इन 925 आरोपी पुलिस कर्मियों में से अब तक एक भी जवान को अदालत से सजा नहीं मिल सकी है। पुलिस कमिश्नर सतीश गोल्चा के नेतृत्व वाली दिल्ली पुलिस के इस आंतरिक संकट पर कानूनी विशेषज्ञों ने गहरी चिंता जताई है। विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि जब खाकी वर्दी पर ही संगीन आरोप लगते हैं, तो स्थानीय पुलिस की जांच अक्सर सुस्त पड़ जाती है, जिससे निष्पक्षता प्रभावित होती है।
वकील गौरव भारद्वाज का कहना है कि दुष्कर्म और अन्य गंभीर अपराधों के मामलों में कानून के मुताबिक समयबद्ध तरीके से ट्रायल पूरा किया जाना अनिवार्य है ताकि पीड़ितों को त्वरित न्याय मिल सके। कानूनी जानकारों ने मांग की है कि दिल्ली की कानून व्यवस्था में जनता का भरोसा कायम रखने के लिए ऐसे मामलों की जांच स्वतंत्र एजेंसियों (जैसे सीबीआई) से कराई जानी चाहिए। बहरहाल, इस खुलासे के बाद अब देखना यह है कि Delhi Police Criminal Cases के निपटारे और दागी जवानों पर कार्रवाई के लिए विभाग क्या कड़े कदम उठाता है।