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सड़कों पर राहगीर बेमौत मरने को मजबूर: Delhi road accident डेटा में हुआ बेहद खौफनाक खुलासा

दिल्ली की सड़कों पर पैदल चलने वाले राहगीर सबसे बड़े खतरे में हैं। आंकड़ों के मुताबिक होने वाली कुल मौतों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी राहगीरों की ही है।
सड़कों पर राहगीर बेमौत मरने को मजबूर: Delhi road accident डेटा में हुआ बेहद खौफनाक खुलासा

सड़कों पर राहगीर बेमौत मरने को मजबूर: Delhi road accident डेटा में हुआ बेहद खौफनाक खुलासा

देश की राजधानी दिल्ली में पैदल चलना भी दुश्वार है....जी हां ये हम नहीं कह रहे हैं बल्कि दिल्ली पुलिस के आंकड़े कह रहे हैं। दिल्ली यातायात पुलिस राजधानी में होने वाले सड़क हादसों पर बकायदा अध्ययन करती ै। जिसकी रिपोर्ट भी तैयार की जाती है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की 2024 की रिपोर्ट की मानें तो Delhi road accident डेटा के विश्लेषण से एक बेहद डरावनी तस्वीर साफ हुई है। दिल्ली में होने वाले घातक सड़क हादसों में सबसे ज्यादा जान किसी कार या बड़ी गाड़ी में बैठे लोगों की नहीं, बल्कि सड़क किनारे या फुटपाथ पर चलने वाले मासूम राहगीरों (Pedestrians) की जा रही है।

आंकड़ों के अनुसार, सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने और जान गंवाने वाले लोगों में मोटरसाइकिल सवारों के साथ-साथ पैदल चलने वाले लोग सबसे आगे हैं। इन दोनों समूहों को 'वल्नरेबल रोड यूजर्स' यानी सबसे असुरक्षित सड़क उपयोगकर्ता माना गया है।

 

Delhi road accident में राहगीरों की मौत का क्या है आंकड़ा?

डेटा के मुताबिक, दिल्ली में होने वाले कुल Delhi road accident की मौतों में 38% हिस्सेदारी अकेले पैदल चलने वाले राहगीरों की है। वहीं दुर्घटनाओं में घायल होने वाले कुल पीड़ितों में 34% पैदल यात्री शामिल हैं। सामान्य ट्रेंड को देखें तो दिल्ली में होने वाले कुल घातक हादसों में राहगीरों की मौत का आंकड़ा हमेशा 40% से 50% के बीच ही मंडराता रहता है।

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साल-दर-साल बढ़ रहा है राहगीरों के लिए खतरा (2023 vs 2024)

हादसों को रोकने के तमाम दावों के बावजूद राहगीर लगातार उन दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं जिन्हें आसानी से टाला जा सकता था। अगर पिछले दो सालों के आंकड़ों की तुलना की जाए, तो स्थिति बेहद गंभीर नजर आती है:

  • वर्ष 2023 का डेटा: दिल्ली की सड़कों पर हादसों का शिकार होकर कुल 622 राहगीरों ने दम तोड़ा था, जबकि 1,941 राहगीर गंभीर रूप से घायल हुए थे। यह साल भर में हुई कुल मौतों का 42.7% हिस्सा था।
  • वर्ष 2024 का डेटा: दुर्घटनाओं में 584 राहगीरों की मौत हुई और 1,777 राहगीर घायल हुए। कुल मौतों में यह हिस्सेदारी 37.65% दर्ज की गई।

 

सांख्यिकी विश्लेषण: क्यों निशाने पर हैं राहगीर?

राहगीरों की सुरक्षा का बुनियादी ढांचा कितना कमजोर है, इसे नीचे दी गई तालिका से आसानी से समझा जा सकता है:

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सड़क दुर्घटना में राहगीरों (Pedestrians) की स्थिति

 

पैमाना (Parameter)

वर्ष 2023 का आंकड़ा

वर्ष 2024 का आंकड़ा

स्थिति का विश्लेषण

राहगीरों की मौत (Deaths)

622

584

मामूली गिरावट, पर अब भी बेहद गंभीर

घायल राहगीर (Injured)

1,941

1,777

सैकड़ों राहगीर हुए अपंगता का शिकार

कुल मौतों में हिस्सेदारी (%)

42.7%

37.65%

हर तीसरी मौत एक राहगीर की है

 

एक्सपर्ट्स का क्या कहना है? क्यों असुरक्षित हैं दिल्ली के पैदल यात्री?

सड़क सुरक्षा से जुड़े जानकारों का मानना है कि दिल्ली की सड़कों का डिजाइन वाहनों की रफ्तार को ध्यान में रखकर बनाया गया है, न कि इंसानों के चलने के लिए।

  1. फुटपाथों पर अवैध कब्जा: दिल्ली के अधिकांश इलाकों में फुटपाथ या तो टूटे हुए हैं या उन पर दुकानों और गाड़ियों का अवैध कब्जा है। इसके चलते राहगीरों को मजबूरन मुख्य सड़क पर चलना पड़ता है।
  2. सुरक्षित क्रॉसिंग की कमी: सड़कों पर जेब्रा क्रॉसिंग, सब-वे या फुट-ओवर ब्रिज की भारी कमी है। जहाँ ये मौजूद भी हैं, वहाँ तेज रफ्तार गाड़ियाँ पैदल चलने वालों को रास्ता (Right of Way) नहीं देतीं।

 

Delhi road accident (राहगीर सुरक्षा) से जुड़े मुख्य सवाल

 

प्रश्न 1: Delhi road accident रिपोर्ट में राहगीरों को किस श्रेणी में रखा गया है?

उत्तर: पैदल चलने वाले राहगीरों और मोटरसाइकिल सवारों को 'वल्नरेबल रोड यूजर्स' (सबसे असुरक्षित सड़क उपयोगकर्ता) की श्रेणी में रखा गया है, क्योंकि कुल हादसों के 77% शिकार यही लोग होते हैं।

 

प्रश्न 2: दिल्ली में सड़क हादसों के दौरान कुल मौतों में राहगीरों की कितनी हिस्सेदारी है?

उत्तर: कुल मौतों में अकेले पैदल यात्रियों (राहगीरों) की हिस्सेदारी 38% है, जो कि किसी भी एक श्रेणी के लिए बेहद चिंताजनक आंकड़ा है।

 

प्रश्न 3: साल 2024 में दिल्ली में कितने राहगीरों ने अपनी जान गंवाई?

उत्तर: वर्ष 2024 में दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में हुए सड़क हादसों में 584 राहगीरों की मौत हुई और 1,777 लोग घायल हुए।

Devendra yadav

Devendra yadav

वर्ष 2009 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय देवेंद्र यादव एक अनुभवी और प्रखर पत्रकार हैं। उन्होंने 'महामेधा' और प्रतिष्ठित राष्ट्रीय समाचार एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' जैसे अग्रणी मीडिया संस्थानों में लंबे समय तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन किया है। ज़मीनी पत्रकारिता से लेकर खबरों के गहरे विश्लेषण में माहिर देवेंद्र जी की राजनीतिक और प्रशासनिक मामलों पर मजबूत पकड़ है। वर्तमान में 'दिल्ली डेस्क' (Delhi Desk) के साथ जुड़कर वे दिल्ली के इतिहास समेत दिल्ली सरकार के कामकाज, राजधानी के सियासी घटनाक्रमों के साथ-साथ यहाँ की कला, संस्कृति और बदलते लाइफस्टाइल पर पैनी नज़र रख रहे हैं और डिजिटल मीडिया में अपनी लेखनी का लोहा मनवा रहे हैं।

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