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Delhi Tram Revival | 1963 में बंद हुई थी सेवा, अब 63 साल बाद चांदनी चौक में फिर दौड़ेगी ट्राम

पुरानी दिल्ली में 1908 से 1963 तक चली इलेक्ट्रिक ट्राम, 63 साल बाद अब चांदनी चौक में फिर से लौटने की तैयारी — SRDC ने बनाई पूरी प्रोजेक्ट रिपोर्ट।
Delhi Tram Revival | 1963 में बंद हुई थी सेवा, अब 63 साल बाद चांदनी चौक में फिर दौड़ेगी ट्राम

दिल्ली-6, यानी पुरानी दिल्ली की तंग गलियों में 63 साल बाद एक बार फिर ट्राम (Tram) चलाने की तैयारी हो रही है। 1950 और 60 के दशक में यही ट्राम धीरे-धीरे बाज़ारों के बीच से गुज़रती हुई लोगों को घर से दफ्तर, दुकान से स्टेशन तक पहुंचाती थी।

 

कब शुरू हुई थी दिल्ली में ट्राम

दिल्ली में इलेक्ट्रिक ट्राम सेवा 6 मार्च 1908 को शुरू हुई थी। टाउन हॉल (Town Hall) पर हुए उद्घाटन समारोह में खुद वायसराय लॉर्ड हार्डिंग (Lord Hardinge) मौजूद थे। दिलचस्प बात यह है कि दिल्ली में बिजली सिर्फ 5 साल पहले, 1903 में ही आई थी, और उसी बिजली से यह ट्राम चलती थी।

इस सेवा को दिल्ली इलेक्ट्रिक ट्रामवेज एंड लाइटिंग कंपनी (Delhi Electric Tramways and Lighting Company) चलाती थी, जिसे बाद में दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई एंड ट्रैक्शन कंपनी भी कहा गया।

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24 ट्राम, 15 किलोमीटर ट्रैक — कहां-कहां जाती थी

ट्राम की रफ्तार सिर्फ 10-15 किलोमीटर प्रति घंटा होती थी। 1920 के दशक की शुरुआत में यह सेवा अपने चरम पर थी, जब करीब 24 खुली ट्राम गाड़ियां और 15 किलोमीटर लंबा ट्रैक मौजूद था। यह ट्रैक इन 11 इलाकों से होकर गुज़रता था:

  • जामा मस्जिद
  • चांदनी चौक
  • चावड़ी बाज़ार
  • लाल कुआं
  • फतेहपुरी
  • सब्ज़ी मंडी
  • सदर बाज़ार
  • पहाड़गंज
  • अजमेरी गेट
  • बाड़ा हिंदू राव
  • तीस हज़ारी

किराया आधा आना (करीब 3 पैसे) से लेकर 4 आना तक था। ट्राम में तीन क्लास होती थीं — निचला, मध्य और ऊपरी डिब्बा।

नेहरू जी की शादी में पहुंची थी ट्राम से बारात

1916 में जवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru) की शादी सीताराम बाज़ार इलाके में हुई थी, और कहा जाता है कि बारात के कुछ मेहमान ट्राम से ही वहां पहुंचे थे।

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55 साल चलने के बाद क्यों बंद हुई सेवा

आज़ादी के बाद दिल्ली की आबादी तेज़ी से बढ़ी, बाज़ार भीड़भाड़ वाले हो गए, बसें-कारें बढ़ गईं। धीमी गति से चलने वाली ट्राम को तंग सड़कों पर जगह मिलना मुश्किल हो गया। आखिरकार दिसंबर 1963 में, यानी शुरुआत के 55 साल बाद, यह सेवा पूरी तरह बंद कर दी गई।

अब 63 साल बाद क्यों लौट रही है ट्राम

दिल्ली सरकार अब ट्राम को वापस लाने पर विचार कर रही है। शाहजहानाबाद पुनर्विकास निगम, SRDC (Shahjahanabad Redevelopment Corporation) इस पर काम कर रहा है और चांदनी चौक इलाके के लिए ट्रामवे सिस्टम की एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (Detailed Project Report) भी तैयार कर चुका है। सरकार का मानना है कि ट्राम लौटने से प्रदूषण घट सकता है और दुकानदारों, स्थानीय निवासियों व पर्यटकों के लिए आना-जाना आसान हो सकता है।

Sanjeev Kumar Mishra

Sanjeev Kumar Mishra

संजीव कुमार मिश्र 15 साल से श्रमजीवी पत्रकार हैं। 2009 में जर्नलिज्म में मास्टर करने के बाद राजधानी दिल्ली के प्रतिष्टित अखबारों, न्यूज चैनलों में काम किया। संजीव कुमार मिश्र के पत्रकारिता के करियर में जनसंदेश न्यूज चैनल, हरिभूमि अखबार, महामेधा अखबार, हमारा महानगर, डीएलए, दीयंगिस्तान और दैनिक जागरण महत्वपूर्ण पड़ाव है। दैनिक जागरण में साढ़े नौ साल की लंबी पारी खेली। दैनिक जागरण के राज्य ब्यूरो की सिटी टीम में कार्य करते हुए बाल आयोग, महिला आयोग से ना केवल संवेदनशील खबरें लिखीं बल्कि ट्रैफिक पुलिस, नगर निगम, स्थानी बाजारों पर भी मजबूत पकड़ बनाई। अन्ना आंदोलन, वसंत विहार सामूहिक दुष्कर्म कांड के दौरान संजीव कुमार मिश्र की कई खबरें चर्चा के केंद्रबिंदू में रहीं। इस समय Delhi Desk में सीनियर कंटेट एडिटर के रूप में कार्यरत।

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