दिल्ली एक ऐसा ऐतिहासिक शहर है, जिसकी हर गली-कूचे में सदियों पुरानी यादें दबी हुई हैं। शायद ही कोई दूसरा शहर हो, जो इतनी बार बसा और उजड़ा हो। दिल्ली के हिंदू काल (Hindu Period) का इतिहास सबसे कम जाना-पहचाना है, क्योंकि इसका आधार दस्तावेज़ नहीं बल्कि पुराणों और महाभारत (Mahabharata) की कथाएं हैं।
दिल्ली के इतिहास के पांच दौर
दिल्ली के इतिहास को मोटे तौर पर पांच कालखंडों में बांटा जा सकता है:
- हिंदू काल (Hindu Period)
- मुस्लिम/पठान काल (Muslim/Pathan Period)
- मुगल काल (Mughal Period)
- ब्रिटिश काल (British Period)
- स्वराज या आधुनिक काल (Modern/Independence Period)
इनमें सबसे कम जानकारी हिंदू काल के बारे में मिलती है, क्योंकि इस दौर का कोई पक्का दस्तावेज़ी इतिहास मौजूद नहीं है।
दिल्ली को क्यों कहा जाता है "भारत का रोम"
दिल्ली को अक्सर "भारतवर्ष का रोम" कहा जाता है, क्योंकि जिस तरह रोम शहर (Rome) सात मशहूर पहाड़ियों पर बसा है, उसी तरह दिल्ली भी सात अलग-अलग बस्तियों के उजड़ने-बसने से बनी मानी जाती है। तुगलकाबाद (Tughlaqabad), महरौली (Mehrauli), चांदनी चौक/चंद्रावल और यमुना नदी (Yamuna River) का पश्चिमी किनारा — इन्हीं के बीच करीब 55 वर्ग मील का इलाका पुराने खंडहरों से भरा पड़ा है।
सात प्राचीन हिंदू नगरियों में दिल्ली का नाम नहीं
दिलचस्प बात यह है कि हिंदू परंपरा की सात सबसे पवित्र नगरियों में दिल्ली शामिल नहीं है:
- अयोध्या (Ayodhya)
- मथुरा (Mathura)
- मायापुरी/हरिद्वार (Mayapuri/Haridwar)
- काशी (Kashi)
- कांची/कांजीवरम (Kanchi/Kanjivaram)
- अवंतिकापुरी/उज्जैन (Avantikapuri/Ujjain)
- द्वारावती/द्वारका (Dwaravati/Dwarka)
महाभारत में मिलता है दिल्ली का पहला ज़िक्र — इंद्रप्रस्थ की कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, दिल्ली का सबसे पहला नाम इंद्रप्रस्थ (Indraprastha) महाभारत में मिलता है। कथा के अनुसार पांडवों (Pandavas) ने खांडव वन को साफ करवाकर वहां इंद्रप्रस्थ नगरी बसाई थी, जो आगे चलकर दिल्ली कहलाई — यह पौराणिक मान्यता है, पुरातात्विक रूप से पूरी तरह प्रमाणित तथ्य नहीं।
इंद्रप्रस्थ से भी पहले की एक और पौराणिक कथा — खांडव वन
पुराणों में इससे भी पुरानी एक कथा मिलती है। इसके अनुसार यमुना किनारे एक विशाल जंगल था, जिसे खांडव वन (Khandav Van) या इंद्र वन कहा जाता था। मान्यता है कि चंद्रवंशी राजा सुदर्शन (Raja Sudarshan) ने इस वन को कटवाकर वहां खांडवी (Khandavi) नाम की एक सुंदर नगरी बसाई, जो पौराणिक विवरण के अनुसार करीब 100 योजन लंबी और 32 योजन चौड़ी थी।
असली इतिहास कहां से शुरू होता है
ईसा की दसवीं सदी से पहले की दिल्ली का न तो कोई ठोस ऐतिहासिक प्रमाण मिलता है, न पुरातात्विक यादगार। हिंदू काल की दिल्ली के बारे में जो कुछ जाना जाता है, वह किंवदंतियों, पुराणों और महाभारत की कथाओं से आता है — यह श्रद्धा और परंपरा का विषय है, प्रमाणित इतिहास का नहीं।