यमुना पुनरुद्धार परियोजनाओं का शिलान्यास जनता की आंखों में धूल झोंकना: देवेंद्र यादव का बीजेपी सरकार पर तीखा प्रहार
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा यमुना पुनरुद्धार की 43 परियोजनाओं (जिनमें 29 विकेंद्रीकृत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और सीवेज पंपिंग स्टेशन शामिल हैं) के शिलान्यास पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने इसे दिल्ली की जनता की आंखों में धूल झोंकने वाला कदम करार देते हुए कहा कि इन 29 में से 27 डीएसटीपी के लिए फंड की मंजूरी अप्रैल 2025 में ही मिल चुकी थी।
देवेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली में 52 किलोमीटर लंबी यमुना रिवर फ्रंट योजना को लेकर विशेषज्ञ भी चिंता जता रहे हैं, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में हजारों करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद यमुना हर दिन अधिक विषैली होती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा अमृत मिशन-2 के तहत देश भर में 100 प्रतिशत सीवरेज कवरेज का लक्ष्य दिल्ली में पूरी तरह धराशायी हो चुका है।
'12 वर्षों में नई सीवर और पानी की पाइपलाइन डालने में सरकार नाकाम'
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि केंद्र में भाजपा, दिल्ली में पिछली आम आदमी पार्टी और मौजूदा भाजपा सरकार—पिछले 12 वर्षों में दिल्ली में नई सीवर और पानी की पाइपलाइन बिछाने के काम में पूरी तरह नाकाम साबित हुई हैं। 8,941 करोड़ रुपये की योजनाओं में एसटीपी परियोजनाओं की शुरुआत को उन्होंने केवल एक 'खोखली घोषणा' बताया, क्योंकि 22 नालों का अनुपचारित मल सीधे यमुना में गिरने से रोकने के लिए अभी तक कोई ठोस उपाय नहीं किए गए हैं।
यादव ने कहा कि जनता केवल विज्ञापनों और भाषणों से यह मान लेती है कि सब ठीक हो रहा है, जबकि वास्तविकता बेहद भयानक है और अधिकारी-विशेषज्ञ इस स्थिति से अंदरूनी रूप से चिंतित हैं।
गोबर के आंकड़ों पर सरकार को घेरा
गृहमंत्री अमित शाह के उस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए जिसमें उन्होंने पिछले 30 सालों से यमुना में 2000 टन प्रतिदिन गोबर डेरियों से डालने की बात कही थी, देवेंद्र यादव ने कहा कि 1993-98 तक दिल्ली में भाजपा सरकार रही है और 2007 से अब तक लगभग 20 वर्षों से नगर निगम में भी भाजपा का ही शासन रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सवाल किया कि अगर 30 वर्षों से ऐसा हो रहा है, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है? जबकि वास्तविकता यह है कि वर्तमान में केवल 1500 टन पशु अपशिष्ट उत्पन्न होता है, ऐसे में वर्षों पहले डेरियों में इतने पशु होने का दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है।
हरित बजट और पुरानी घोषणाओं पर सवाल
देवेंद्र यादव ने कहा कि 2026-27 के हरित बजट के तहत रेखा गुप्ता सरकार ने 22,236 करोड़ रुपये में से सबसे बड़ा हिस्सा—6,485 करोड़ रुपये—दिल्ली जल बोर्ड के नए एसटीपी बनाने और नालों को रोकने के लिए रखा था, लेकिन जमीन पर कोई काम नहीं हुआ। उन्होंने पूछा कि चंद्रावल जल शोधन संयंत्र, 358 अनाधिकृत कॉलोनियों और 113 गांवों में एसटीपी व सीवेज पंपिंग स्टेशन की घोषणा पहले ही हो चुकी थी, तो फिर इन्हें यमुना पुनरुद्धार कार्यक्रम में दोबारा क्यों शामिल किया गया?
यादव ने अंत में कहा कि साबरमती मॉडल की तर्ज पर यमुना को सुधारने के दावों के विपरीत, सरकार केवल दस्तावेजों की खानापूर्ति कर रही है और जिन 43 परियोजनाओं का लोकार्पण किया गया है, उनका काम भी अभी आधा-अधूरा ही है।