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Delhi Crime News: आजादपुर मंडी में आधी रात का खेल, किन्नर बनकर मिर्ची स्प्रे से लूटते थे बांग्लादेशी घुसपैठिए

दिल्ली पुलिस की फॉरेनर सेल ने आजादपुर मंडी (महेंद्र पार्क) से दो बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी रात के अंधेरे में किन्नर (Transgender) का रूप धारण कर मिर्ची स्प्रे की मदद से लूटपाट की वारदातों को अंजाम देते थे।
Delhi Crime News: आजादपुर मंडी में आधी रात का खेल, किन्नर बनकर मिर्ची स्प्रे से लूटते थे बांग्लादेशी घुसपैठिए

Delhi Crime News: आजादपुर मंडी में आधी रात का खेल, किन्नर बनकर मिर्ची स्प्रे से लूटते थे बांग्लादेशी घुसपैठिए

Delhi Crime News: राजधानी दिल्ली के उत्तर-पश्चिम (North-West) जिले से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों और दिल्ली पुलिस के होश उड़ा दिए हैं। दिल्ली पुलिस की फॉरेनर सेल ने आजादपुर एन.एस. मंडी (महेंद्र पार्क) इलाके से दो अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की कड़ी पूछताछ में इन आरोपियों ने दिल्ली में छिपकर रहने और अपराध करने का जो 'मोडस ऑपेरेंडी' (काम करने का तरीका) बताया, वह किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं है। ये शातिर अपराधी रात के अंधेरे में किन्नर (Transgender) का भेष बदलकर लूट की बड़ी वारदातों को अंजाम दे रहे थे।

 

क्या है बांग्लादेशी घुसपैठियों का 'किन्नर गैंग' और कैसे देते थे वारदात को अंजाम?

गिरफ्तार बांग्लादेशी नागरिक रात के समय आजादपुर मंडी इलाके में किन्नरों की पोशाक पहनकर घूमते थे ताकि राहगीरों और ग्राहकों को आसानी से जाल में फंसा सकें। जैसे ही कोई व्यक्ति इनके करीब आता, ये उसके चेहरे पर मिर्ची स्प्रे (Chilli Spray) झोंक देते थे और पलक झपकते ही उसका कीमती सामान, मोबाइल और नकदी लूटकर फरार हो जाते थे।

 

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'सायलेंट कमबैक': एक साल पहले हुआ था डिपोर्ट, किन्नर बनकर दोबारा घुसा भारत

इस पूरी कहानी का सबसे चौंकाने वाला पहलू मुख्य आरोपी मोहम्मद रुहुल अमीन उर्फ तुली दास का है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, यह उसका भारत में दूसरा 'साइलेंट कमबैक' था:

  • जून 2025: रुहुल अमीन को दिल्ली पुलिस की फॉरेनर सेल ने अवैध रूप से रहने के आरोप में पहली बार पकड़ा था और कानूनी प्रक्रिया के तहत वापस बांग्लादेश डिपोर्ट (Deport) कर दिया था।
  • जून 2026: ठीक एक साल बाद, वह दोबारा अंतरराष्ट्रीय सीमा लांघकर अवैध रास्ते से भारत में घुस आया। इस बार पकड़े जाने से बचने के लिए उसने दिन में छिपने और रात में किन्नर का भेष धरने का नया रास्ता चुना।

वह महेंद्र पार्क इलाके में अपने दूसरे बांग्लादेशी साथी मोहम्मद जीबोन मिया उर्फ लिली के साथ रह रहा था। जीबोन मिया दिन में एक रसोइए (Cook) का काम करता था और रात होते ही दोनों मिलकर किन्नर का भेष बदल लेते थे।

 

प्रतिबंधित चीनी ऐप 'IMO' से हो रही थी बात, पुलिस ने बिछाया जाल

एसीपी ऑपरेशन्स सेल राजीव ढाका और इंस्पेक्टर विपिन कुमार की देखरेख में सब-इंस्पेक्टर श्यामबीर और हेड कांस्टेबल विक्रम की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर तड़के सुबह महेंद्र पार्क थाना क्षेत्र में घेराबंदी की। पुलिस ने जब मुखबिर के इशारे पर दोनों को दबोचा, तो इनके पास से असली बांग्लादेशी नेशनल आईडी कार्ड और दो स्मार्टफोन बरामद हुए।

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हैरानी की बात यह है कि इन स्मार्टफोन्स में भारत में सुरक्षा कारणों से प्रतिबंधित 'IMO' एप्लीकेशन इंस्टॉल थी, जिसका इस्तेमाल ये सुरक्षा एजेंसियों की रडार से बचकर सीमा पार बात करने के लिए कर रहे थे।

'किन्नर घुसपैठिया' कांड की पूरी कुंडली

ऑन-स्पॉट रिपोर्ट (On-Spot Report)

गिरफ्तारी की जगह और समय

महेंद्र पार्क, एन.एस. मंडी, आजादपुर

आरोपियों के नाम (उर्फ नाम)

मोहम्मद रुहुल अमीन (तुली दास) और मोहम्मद जीबोन मिया (लिली)

वारदात का मुख्य हथियार

01 मिर्ची स्प्रे (आरोपी के बैग से बरामद)

डिजिटल सबूत

02 स्मार्टफोन (प्रतिबंधित IMO ऐप के साथ) और बांग्लादेशी आईडी

पुलिस की अगली कार्रवाई

FRRO के समक्ष पेशी, दोबारा डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू

 

पुलिस ने मुख्य आरोपी के बैग से वारदात में इस्तेमाल होने वाला मिर्ची स्प्रे का डिब्बा भी जब्त कर लिया है। दोनों ही आरोपियों के पास भारत में रहने का कोई वैध दस्तावेज (पासपोर्ट या वीजा) नहीं था। दिल्ली पुलिस ने दोनों को विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) के सामने पेश कर दिया है, जहां से इन्हें दोबारा कड़े पहरे में डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। पुलिस अब इस बात का पता लगा रही है कि दिल्ली में इस 'किन्नर गैंग' के पीछे और कितने अवैध नागरिक शामिल हैं।

 

FAQs

 

प्रश्न 1: आरोपी रात में ही इस वारदात को क्यों अंजाम देते थे?

उत्तर: आजादपुर मंडी में रात और तड़के सुबह व्यापारियों और राहगीरों की भारी आवाजाही होती है। अंधेरे का फायदा उठाकर और किन्नर का भेष धरकर ये लोग आसानी से किसी को भी शिकार बना लेते थे और भीड़ में गायब हो जाते थे।

 

प्रश्न 2: क्या इन बांग्लादेशी नागरिकों ने कोई फर्जी भारतीय आईडी (जैसे आधार या वोटर कार्ड) भी बनवा रखा था?

उत्तर: शुरुआती जांच में इनके पास से केवल मूल बांग्लादेशी नेशनल आईडी कार्ड और स्मार्टफोन मिले हैं। पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि क्या इन्होंने दिल्ली में रहने के लिए कोई फर्जी स्थानीय दस्तावेज तैयार करवाने की कोशिश की थी या नहीं।

Sanjeev Kumar Mishra

Sanjeev Kumar Mishra

संजीव कुमार मिश्र 15 साल से श्रमजीवी पत्रकार हैं। 2009 में जर्नलिज्म में मास्टर करने के बाद राजधानी दिल्ली के प्रतिष्टित अखबारों, न्यूज चैनलों में काम किया। संजीव कुमार मिश्र के पत्रकारिता के करियर में जनसंदेश न्यूज चैनल, हरिभूमि अखबार, महामेधा अखबार, हमारा महानगर, डीएलए, दीयंगिस्तान और दैनिक जागरण महत्वपूर्ण पड़ाव है। दैनिक जागरण में साढ़े नौ साल की लंबी पारी खेली। दैनिक जागरण के राज्य ब्यूरो की सिटी टीम में कार्य करते हुए बाल आयोग, महिला आयोग से ना केवल संवेदनशील खबरें लिखीं बल्कि ट्रैफिक पुलिस, नगर निगम, स्थानी बाजारों पर भी मजबूत पकड़ बनाई। अन्ना आंदोलन, वसंत विहार सामूहिक दुष्कर्म कांड के दौरान संजीव कुमार मिश्र की कई खबरें चर्चा के केंद्रबिंदू में रहीं। इस समय Delhi Desk में सीनियर कंटेट एडिटर के रूप में कार्यरत।

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