मानसून की विदाई के मौके पर दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम (Talkatora Stadium) में रविवार को 'बदरिया' सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें हज़ारों लोगों ने पूर्वांचल की समृद्ध लोक संस्कृति का आनंद लिया। यह कार्यक्रम मैथिली-भोजपुरी अकादमी (Maithili-Bhojpuri Akademi) और दिल्ली सरकार के सहयोग से माता चकेरी देवी फाउंडेशन (Mata Chakeri Devi Foundation) द्वारा आयोजित किया गया। इसका उद्घाटन दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा (Harsh Malhotra) ने दीप प्रज्वलित कर किया।
सांसद मनोज तिवारी और मालिनी अवस्थी ने बांधा समां
सांसद मनोज तिवारी (Manoj Tiwari) ने पूर्वांचल का पारंपरिक पचरा गाकर दर्शकों को झुमाया, वहीं मशहूर लोक गायिका मालिनी अवस्थी (Malini Awasthi) ने अपने लोकगीतों से हज़ारों लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। दोनों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में पूर्वांचल की लोक संस्कृति और परंपरा का रंग भर दिया।
अन्य कलाकारों की प्रस्तुतियां
लोक गायिका अनुराधा सिंह (Anuradha Singh) के भक्ति गीतों और विभिन्न समूहों की नृत्य प्रस्तुतियों ने भी दर्शकों का दिल जीता। इसके अलावा वाद्य संगीतकार शौभिक सरकार, सौरव गांगुली, संभवी पाठक, सनवी पाठक, रूपक डे और चंदन तिवारी ने भोजपुरी और मैथिली गीतों से माहौल को जीवंत बना दिया।
हर्ष मल्होत्रा ने क्या कहा
अपने संबोधन में हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि भारत की विविधता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि देश में हर 50-60 किलोमीटर पर भाषा और बोली बदल जाती है, लेकिन मूल संस्कृति एक ही रहती है — बंधुत्व, आत्मीयता और परोपकार। उन्होंने बताया कि 'बदरिया' का यह आयोजन दूसरी बार हो रहा है, और इसकी खासियत सिर्फ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां नहीं, बल्कि समाज के वंचित और पीड़ित वर्गों की चिंता करना भी है।
कौन-कौन रहा मौजूद
कार्यक्रम में दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता (Vijender Gupta), संगठन महामंत्री पवन राणा (Pawan Rana), दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा (Kapil Mishra), महापौर प्रवेश वाही (Pravesh Wahi), उपमहापौर डॉ. मोनिका पंत (Dr. Monika Pant), फाउंडेशन अध्यक्ष योगिता सिंह (Yogita Singh), फाउंडेशन ट्रस्टी बृजेश राय (Brajesh Rai), दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष लता गुप्ता (Lata Gupta) समेत कई पदाधिकारी और हज़ारों लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम का मकसद
आयोजकों के मुताबिक इस कार्यक्रम का उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज के उन लोगों को भी साथ जोड़ना है जो किसी कारणवश उपेक्षित महसूस करते हैं — ताकि उनके बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले और परिवार सम्मान के साथ जीवन जी सकें।