दिल्ली के तीन सबसे बड़े कूड़े के पहाड़ों — ओखला (Okhla), भलस्वा (Bhalswa) और गाज़ीपुर (Ghazipur) — को हटाने की दिशा में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) की सरकार ने बड़ी प्रगति हासिल की है। अब तक इन तीनों साइट्स पर कुल 2.16 करोड़ मीट्रिक टन कचरे को प्रोसेस किया जा चुका है और 100 एकड़ भूमि को दोबारा उपयोग लायक बनाया गया है।
तीनों साइट्स का अलग-अलग आंकड़ा
- ओखला: करीब 70 लाख मीट्रिक टन कचरा प्रोसेस — 35 एकड़ भूमि रिक्लेम
- भलस्वा: करीब 102 लाख मीट्रिक टन कचरा प्रोसेस — 45 एकड़ भूमि रिक्लेम
- गाज़ीपुर: करीब 44 लाख मीट्रिक टन कचरा प्रोसेस — 20 एकड़ भूमि रिक्लेम
क्या बोलीं मुख्यमंत्री
रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में सालों से कूड़े के पहाड़ एक बड़ी समस्या बने हुए थे, और उनकी सरकार ने इन्हें हटाने का वादा किया था। उन्होंने इसे एक वैज्ञानिक रोडमैप और समयबद्ध कार्यप्रणाली का नतीजा बताया। CM के मुताबिक, "जनता के एक वोट से दिल्ली में सरकार की प्राथमिकताएं बदलीं, और अब कूड़े के पहाड़ ढहने लगे हैं।"
कचरे से निकले मटेरियल का भी हो रहा उपयोग
गाज़ीपुर में कचरा प्रोसेस करने के बाद निकलने वाले इनर्ट मटेरियल का इस्तेमाल निचले इलाकों को भरने और सड़कों के नीचे बेस तैयार करने में किया जा रहा है — यानी सिर्फ कचरा हटाया नहीं जा रहा, बल्कि उससे निकलने वाली सामग्री का भी वैज्ञानिक इस्तेमाल हो रहा है।
आगे की योजना — 4 नए वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट
सरकार ने दिल्ली में 4 नए वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट (Waste-to-Energy Plant) स्थापित करने की तैयारी पूरी कर ली है। CM के मुताबिक इन प्लांट्स के शुरू होने के बाद दिल्ली में रोज़ाना पैदा होने वाला कचरा उसी दिन प्रोसेस किया जा सकेगा, ताकि भविष्य में दोबारा कोई नया कूड़े का पहाड़ न बने।
इलाकों में रहने वालों को क्या फायदा
CM ने कहा कि इस पहल का असर सिर्फ ज़मीन रिक्लेम होने तक सीमित नहीं है — आसपास के इलाकों से रोज़ गुज़रने वाले लोगों को अब बेहतर, साफ वातावरण मिल रहा है, जिससे उनकी जीवन गुणवत्ता में भी सुधार हो रहा है।