IIT में बढ़ते आत्महत्या मामलों के बाद बड़ा बदलाव, नए सत्र से छात्रों का तनाव कम करने पर फोकस
देश के सबसे प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों यानी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (Indian Institutes of Technology - IIT) में पिछले कुछ समय में छात्रों की आत्महत्या (Student Suicide) के बढ़ते मामलों ने हर किसी को चिंता में डाल दिया है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए नए शैक्षणिक सत्र (Academic Session) से छात्र कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) को लेकर कई बड़े और महत्वपूर्ण बदलाव किए जा रहे हैं। पहले वर्ष के छात्रों (First Year Students) को कैंपस के माहौल से जोड़ने और उनका मानसिक तनाव कम करने के लिए एक विशेष व्यवस्था लागू की जा रही है।
प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, यह सख्त और संवेदनशील कदम आईआईटी परिसरों में लगातार सामने आ रहे दुखद मामलों के बाद सरकार और सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की सलाह के आधार पर उठाया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाना और उन्हें समय पर आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना है।
पहले वर्ष के छात्रों से होगा दोस्ताना व्यवहार, छोटे सपोर्ट ग्रुप संभालेंगे मोर्चा
संस्थानों के भीतर छात्रों को अकेलापन महसूस न हो, इसके लिए ग्राउंड लेवल पर कई रणनीतियां तैयार की गई हैं:
दोस्ताना माहौल
नए छात्रों के साथ पढ़ाई शुरू होने से ठीक पहले एक बेहद दोस्ताना माहौल (Friendly Environment) बनाया जाएगा, ताकि वे बिना किसी डर या हिचक के आसानी से कैंपस जीवन में ढल सकें।
छोटे सपोर्ट ग्रुप
हर कैंपस में छात्रों के छोटे-छोटे सपोर्ट ग्रुप (Support Groups) बनाए जाएंगे। इन ग्रुप्स में वरिष्ठ छात्र (Senior Students) और प्रोफेसर भी शामिल होंगे।
रचनात्मक कार्यक्रमों से जुड़ाव
छात्रों को मानसिक रूप से स्वस्थ रखने के लिए खेल, योग, संगीत और उनकी रुचि के अन्य रचनात्मक कार्यक्रमों (Creative Programs) से सीधे जोड़ा जाएगा।
खास मॉनिटरिंग
जो छात्र कैंपस में गुमसुम रहते हैं या किसी वजह से मेस में खाना छोड़ देते हैं, उनकी पहचान कर तुरंत सहायता (Immediate Assistance) उपलब्ध कराई जाएगी।
सभी IIT में काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य, डायरेक्टर और डीन की बढ़ेगी जवाबदेही
जांच के अनुसार, अब छात्रों की मानसिक समस्याओं के समाधान की जिम्मेदारी केवल कागजों या सामान्य काउंसलरों तक सीमित नहीं रहेगी।
अनिवार्य काउंसलिंग
अब देश के सभी आईआईटी में पेशेवर काउंसलर (Professional Counselor) की नियुक्ति को पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। छात्रों के लिए नियमित रूप से काउंसलिंग सत्र (Counseling Sessions) आयोजित किए जाएंगे।
अधिकारियों पर गिरेगी गाज
छात्रों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर अब सीधे तौर पर आईआईटी के डायरेक्टर (Director), डीन (Dean) और प्रोफेसरों की भी जवाबदेही (Accountability) तय की जाएगी। किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकार की एक उच्चस्तरीय समिति (High-Level Committee) समय-समय पर इन संस्थानों का औचक निरीक्षण भी करेगी।
आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण छात्रों पर विशेष ध्यान
इस नई व्यवस्था में सोशल जस्टिस और समानता का भी पूरा ध्यान रखा गया है। आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों (Economically Weaker Students) की वित्तीय सहायता करने के लिए संस्थान के पूर्व छात्रों के फंड (Alumni Fund) का उपयोग किया जाएगा। इसके साथ ही, ग्रामीण पृष्ठभूमि (Rural Background) से आने वाले छात्रों के भीतर आत्मविश्वास जगाने और उन्हें नए माहौल में ढालने के लिए विशेष ब्रिजिंग प्रोग्राम (Bridging Programs) चलाए जाएंगे, ताकि वे किसी भी स्तर पर खुद को दूसरों से कमतर न समझें।