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SEBI की जांच में राजेश एक्सपोर्ट्स पर 15 लाख करोड़ की फर्जी कमाई का दावा LIC का पैसा फंसा शेयर डूबा

भारतीय शेयर बाजार और कॉर्पोरेट जगत में एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने बड़े-बड़े दिग्गजों के होश उड़ा दिए हैं। सेबी (SEBI) की शुरुआती जांच रिपोर्ट में देश की जानी-मानी गोल्ड कंपनी 'राजेश एक्सपोर्ट्स' पर अपनी स्विस रिफाइनरी वाल्काम्बी (Valcambi) के जरिए 15.15 लाख करोड़ रुपये ($159 बिलियन) की फर्जी रेवेन्यू दिखाने का संगीन आरोप लगा है।
SEBI की जांच में राजेश एक्सपोर्ट्स पर 15 लाख करोड़ की फर्जी कमाई का दावा LIC का पैसा फंसा शेयर डूबा

मुंबई: भारतीय कॉर्पोरेट और शेयर बाजार के इतिहास में इस समय का सबसे बड़ा और हैरान कर देने वाला वित्तीय विवाद सामने आया है। देश की जानी-मानी स्वर्ण कारोबारी कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स (Rajesh Exports) के खिलाफ चल रही एक आधिकारिक सरकारी जांच में बेहद चौंकाने वाले आरोप लगाए गए हैं पूंजी बाजार नियामक, सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) की इस जांच के अनुसार, कंपनी ने अपनी स्विस रिफाइनिंग यूनिट 'वाल्काम्बी' (Valcambi) के जरिए वित्तीय दस्तावेजों में करीब 159 अरब डॉलर (लगभग 15.15 लाख करोड़ रुपये) की रेवेन्यू (कमाई) को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया है। देश के अकाउंटिंग और ऑडिटिंग इतिहास में इतने बड़े पैमाने पर कथित वित्तीय हेरफेर का यह पहला और अपनी तरह का इकलौता मामला है.

बाजार नियामक द्वारा बुधवार को सार्वजनिक की गई इस शुरुआती रिपोर्ट के बाद पूरे दलाल स्ट्रीट और वित्तीय विश्लेषकों के बीच हड़कंप मच गया है। हर कोई इस बात से हैरान है कि इतने लंबे समय तक रेटिंग एजेंसियां, निवेशक और बाजार के बड़े एक्सपर्ट इस भारी गड़बड़ी को पकड़ने में कैसे चूक गए। इस पूरे मामले की गंभीरता इसलिए भी बहुत ज्यादा बढ़ जाती है क्योंकि भारत की सबसे बड़ी सरकारी बीमा कंपनी और संस्थागत निवेशक भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की राजेश एक्सपोर्ट्स में पूरे 11 फीसदी की हिस्सेदारी है। इस खबर के बाहर आते ही मुंबई स्टॉक एक्सचेंज में कंपनी के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई और शेयर की कीमतें 10 प्रतिशत तक धराशायी हो गईं।

आम जनता और पॉलिसीधारकों पर क्या होगा इसका सीधा असर? 

जब भी किसी बड़ी लिस्टेड कंपनी में इतने बड़े पैमाने पर अकाउंटिंग फ्रॉड के आरोप लगते हैं, तो उसका खामियाजा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से देश के आम नागरिकों को ही उठाना पड़ता है। इस पूरे मामले का जनता पर पड़ने वाला सीधा असर इस प्रकार है:

1. LIC के करोड़ों पॉलिसीधारकों के पैसे पर जोखिम: देश का हर आम और मध्यमवर्गीय परिवार अपनी गाढ़ी कमाई का एक हिस्सा सुरक्षा और भविष्य के लिहाज से LIC की पॉलिसियों में लगाता है। LIC इस प्रीमियम के पैसे को शेयर बाजार की शीर्ष कंपनियों में निवेश करती है। राजेश एक्सपोर्ट्स में LIC की 11% की बड़ी हिस्सेदारी होने का सीधा मतलब यह है कि कंपनी के शेयर गिरने से LIC के पोर्टफोलियो को तगड़ा नुकसान हुआ है, जिसका परोक्ष असर पॉलिसीधारकों के बोनस या रिटर्न पर पड़ सकता है।

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2. खुदरा निवेशकों की पूंजी डूबी: शेयर बाजार में अपनी छोटी पूंजी लगाकर मुनाफा कमाने की चाह रखने वाले सैकड़ों रिटेल निवेशकों ने इस कंपनी के शेयर खरीद रखे थे। सेबी की इस कार्रवाई के बाद सिर्फ एक झटके में कंपनी के शेयर 10% गिर गए। जिन लोगों ने ऊपरी स्तरों पर निवेश किया था, उनकी पूंजी पर इस समय ताला लग गया है और जब तक जांच पूरी नहीं होती, उनका पैसा इस शेयर में फंसा रहेगा।

3. भारतीय कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर भरोसा डगमगाया: इतने बड़े पैमाने पर रेवेन्यू के कथित फर्जीवाड़े ने विदेशी और घरेलू निवेशकों के मन में भारतीय ऑडिटिंग व्यवस्था को लेकर एक डर पैदा कर दिया है। जब आम आदमी का भरोसा सिस्टम से डगमगाता है, तो वे बाजार में सीधे निवेश करने से कतराने लगते हैं, जिसका असर देश की आर्थिक साख पर भी पड़ता है।

वाल्काम्बी और रेवेन्यू का पूरा गणित सेबी की शुरुआती पड़ताल

कीमती धातुओं के रिफाइनिंग क्षेत्र में वाल्काम्बी (Valcambi) को दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरियों में से एक गिना जाता है। साल 2015 में राजेश एक्सपोर्ट्स ने यूरोपियन गोल्ड रिफाइनरीज से इस स्विस यूनिट को पूरे कैश सौदे के तहत खरीदा था, जिसके बाद यह कंपनी वैश्विक स्तर पर एक बड़ी ताकत बनकर उभरी थी। लेकिन सेबी के अंतरिम निष्कर्षों ने इस पूरे गौरवशाली इतिहास पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

सेबी के आदेश के मुताबिक, राजेश एक्सपोर्ट्स ने अप्रैल 2020 से मार्च 2025 के बीच भारतीय शेयर बाजारों को दी गई वित्तीय जानकारियों में अपने घरेलू रेवेन्यू को 15.15 ट्रिलियन रुपये (158.93 अरब डॉलर) तक काल्पनिक रूप से बढ़ाया। सेबी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि कंपनी ने अपने ग्रुप की लगभग पूरी की पूरी कमाई को वाल्काम्बी के खाते मढ़ दिया था। चौंकाने वाली बात यह है कि जब इस स्विस यूनिट के स्टैंडअलोन यानी वास्तविक स्वतंत्र खातों की जांच की गई, तो वहां वार्षिक रेवेन्यू महज 70 मिलियन डॉलर से 100 मिलियन डॉलर (करीब 6.7 अरब से 9.5 अरब रुपये) के बीच ही पाई गई। वास्तविक आंकड़ों और रिपोर्ट किए गए आंकड़ों के बीच का यह विशाल अंतर ही इस पूरे विवाद की मुख्य जड़ है।

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इस पूरे मामले पर राजेश एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन राजेश मेहता ने गुरुवार को वित्तीय अंतर पर कोई सीधी टिप्पणी नहीं की, लेकिन रॉयटर्स से बात करते हुए उन्होंने दावा किया कि बाजार को दिए गए सभी वित्तीय खुलासे पूरी तरह से सही और पारदर्शी हैं। उन्होंने कहा, "सेबी के साथ कुछ गलतफहमी (Miscommunication) हुई है और जानकारी का एक बड़ा गैप है। हमारे वित्तीय आंकड़े पूरी तरह परफेक्ट हैं और कंपनी जांच में सहयोग जारी रखेगी।" वहीं दूसरी तरफ, विवाद के केंद्र में मौजूद वाल्काम्बी ने इस पर कोई भी टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया है।

— राजेश मेहता, चेयरमैन, राजेश एक्सपोर्ट्स

सेबी की जांच रिपोर्ट: मुख्य गंभीर आरोप और हाइलाइट्स

  • कथित रेवेन्यू हेरफेर: अप्रैल 2020 से मार्च 2025 के बीच 15.15 लाख करोड़ रुपये की रेवेन्यू बढ़ाकर दिखाने का आरोप।
  • अफ्रीकी खदानों का रहस्य: कंपनी ने एक्सचेंजों को बताया कि उसने अफ्रीका की सोने की खदानों में 10.35 अरब रुपये का निवेश किया है। लेकिन सेबी को सहायक कंपनियों के दस्तावेजों में इस निवेश का कोई वजूद या पक्के सबूत नहीं मिले।
  • फर्जी कागजी व्यापार (Fictitious Trades): सेबी के मुताबिक, कंपनी ने एक स्थानीय ब्रोकर के साथ मिलकर बिना किसी वास्तविक बैंकिंग लेनदेन या सबूत के 114 अरब रुपये से अधिक की फर्जी खरीद-बिक्री किताबों में दर्ज की।
  • जांच की शुरुआत: साल 2024 में एक शिकायत मिलने के बाद सेबी ने इस मामले की जांच शुरू की थी, जिसमें भारी ट्रेड रिसीवेबल्स (बकाया राशि) का जिक्र था।
  • फॉरेंसिक ऑडिट में बाधा: नियामक द्वारा नियुक्त किए गए फॉरेंसिक ऑडिटर दस्तावेजों और पक्के सबूतों की भारी कमी के कारण कंपनी द्वारा दिखाए गए आंकड़ों के एक बेहद छोटे हिस्से की ही पुष्टि कर पाए।

राजेश एक्सपोर्ट्स का इतिहास और बाजार में मची हलचल

राजेश मेहता और उनके भाई ने साल 1989 में कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से एक बेहद छोटे स्तर पर राजेश एक्सपोर्ट्स की नींव रखी थी। समय के साथ कंपनी ने तेजी से पैर पसारे और आज की तारीख में यह दुनिया के 12 से अधिक देशों में अपना कारोबार संचालित करती है। कंपनी खुद को सोने के कारोबार में रिफाइनिंग से लेकर रिटेल आउटलेट्स तक चेन चलाने वाली एक ग्लोबल लीडर कहती है। साल 2015 में 400 मिलियन डॉलर में वाल्काम्बी का अधिग्रहण करने के बाद इस ग्रुप को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी पहचान मिली थी।

लेकिन वर्तमान में लगे आरोपों के बाद कंपनी की साख पूरी तरह से दांव पर लग गई है शुक्रवार को शेयर बाजारों को भेजे एक स्पष्टीकरण में कंपनी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि कंपनी की कमाई और रेवेन्यू को लेकर जो बातें कही जा रही हैं, वे पूरी तरह से गलत व्याख्या (Misinterpreted) और निराधार हैं। इस बीच, रॉयटर्स द्वारा पूछे गए तीखे सवालों पर एलआईसी (LIC) की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक जवाब या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे बाजार में रहस्य और गहरा गया है।

मुख्य हितधारक / संस्था मामले में वर्तमान स्थिति और हिस्सेदारी सेबी की जांच का मुख्य निष्कर्ष / असर
राजेश एक्सपोर्ट्स (Rajesh Exports) बेंगलुरु से शुरू हुई ग्लोबल गोल्ड कंपनी; शेयरों में 10% की भारी गिरावट। 2020-2025 के बीच $159 बिलियन का रेवेन्यू बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने का आरोप।
LIC (भारतीय जीवन बीमा निगम) कंपनी में 11% इक्विटी शेयरहोल्डिंग के साथ बड़ी हिस्सेदार; फिलहाल साधे हुए है चुप्पी। शेयरों के टूटने से सार्वजनिक क्षेत्र के निवेश और आम पॉलिसीधारकों की पूंजी पर सीधा वित्तीय जोखिम।
वाल्काम्बी (Valcambi, Switzerland) स्विस रिफाइनरी; वास्तविक कमाई केवल $70M से $100M के बीच। दस्तावेजों में इसी इकाई के नाम पर करोड़ों का फर्जी टर्नओवर दिखाने का गंभीर दावा।
अफ्रीकी गोल्ड माइन्स (Africa Mines) दस्तावेजों में 10.35 अरब रुपये के निवेश का दावा। सेबी की जांच में धरातल पर निवेश के अस्तित्व से जुड़े कोई भी पुख्ता प्रमाण नहीं मिले।

पूंजी बाजार के जानकारों का कहना है कि सेबी की यह प्रारंभिक रिपोर्ट आने वाले दिनों में और कड़े कानूनी और रेगुलेटरी एक्शन का रूप ले सकती है। यदि फॉरेंसिक ऑडिट की अंतिम रिपोर्ट में ये आरोप शत-प्रतिशत साबित हो जाते हैं, तो कंपनी के मैनेजमेंट पर बड़ी गाज गिरना तय है। तब तक के लिए आम खुदरा निवेशकों को इस शेयर से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जा रही है। अब पूरे बाजार की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकारी दिग्गज संस्था LIC अपने 11% निवेश को बचाने के लिए कंपनी के बोर्ड रूम में क्या कड़ा रुख अख्तियार करती है।

Delhi Desk

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