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दिल्ली में सिनेमा लाइसेंस लेना अब आसान, खत्म हुई बहु-NOC व्यवस्था, जानें नई समयबद्ध प्रक्रिया

दिल्ली सरकार ने सिनेमाघरों और मल्टीप्लेक्स के लाइसेंस के लिए पुरानी बहु-NOC व्यवस्था खत्म कर नई पारदर्शी, समयबद्ध और पूरी तरह ऑनलाइन SOP लागू की है।
दिल्ली में सिनेमा लाइसेंस लेना अब आसान, खत्म हुई बहु-NOC व्यवस्था, जानें नई समयबद्ध प्रक्रिया

दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार ने सोमवार को सिनेमाहाल को लेकर एक बड़ा निर्णय लिया। दिल्ली सरकार ने राजधानी में सिनेमाघरों और मल्टीप्लेक्स को लाइसेंस देने, नवीनीकरण करने और निरीक्षण करने की प्रक्रिया को पूरी तरह बदल दिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) की सरकार ने नए नियम लागू किए हैं (Standard Operating Procedure/SOP), जिसके तहत वर्षों पुरानी अलग-अलग विभागों से NOC लेने वाली व्यवस्था खत्म कर एकीकृत सिंगल विंडो सिस्टम लागू कर दिया गया है।

 

पहले क्या दिक्कत थी

पुरानी व्यवस्था में सिनेमैटोग्राफ लाइसेंस के लिए आवेदकों को पुलिस, फायर विभाग, नगर निगम, दिल्ली जल बोर्ड, बिजली वितरण कंपनियों और स्वास्थ्य विभाग समेत कई अलग-अलग एजेंसियों से अलग-अलग NOC लेनी पड़ती थीं — यह एक लंबी और बहु-विभागीय प्रक्रिया थी। नई SOP ने इस पूरे झंझट को खत्म कर दिया है।

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दो नई समितियां बनाई गईं

जिला लाइसेंसिंग समिति (District Licensing Committee/DLC) — डिप्टी कमिश्नर (रेवेन्यू)/DM की अध्यक्षता में बनी यह समिति लाइसेंसिंग से जुड़ा अंतिम फैसला लेगी। इसमें पुलिस, फायर विभाग, नगर निगम/DDA इंजीनियरिंग विंग, दिल्ली जल बोर्ड और जिला मेडिकल अधिकारी जैसे विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहेंगे।

 

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जिला निरीक्षण समिति (District Inspection Committee/DIC) — SDM के नेतृत्व वाली यह समिति हर सिनेमाघर का संयुक्त निरीक्षण करेगी और ई-साइन व जियोटैग्ड रिपोर्ट ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल (e-District Portal) पर अपलोड करेगी।

 

हर चरण के लिए तय हुई समय-सीमा

 

- आवेदन की प्रारंभिक जांच: 7 कार्यदिवस के भीतर

- DIC द्वारा निरीक्षण: 45 दिन के भीतर

- निरीक्षण रिपोर्ट के बाद DLC का निर्णय: 30 दिन के भीतर

- अगर DLC तय समय में फैसला नहीं देती, लेकिन DIC रिपोर्ट में सभी वैधानिक-सुरक्षा शर्तें पूरी पाई जाती हैं, तो लाइसेंस पोर्टल पर स्वतः जनरेट हो जाएगा (सुरक्षा मानकों के उल्लंघन वाले मामलों में यह सुविधा लागू नहीं होगी)

 

पूरी प्रक्रिया — आवेदन से लेकर शुल्क भुगतान, निरीक्षण रिपोर्ट, फैसला और फॉर्म B में लाइसेंस जारी करना — अब पूरी तरह ई-डिस्ट्रिक्ट दिल्ली पोर्टल पर ऑनलाइन होगी।

 

 सुरक्षा में कोई ढील नहीं

 

सरकार ने स्पष्ट किया कि प्रक्रिया आसान बनाने का मतलब सुरक्षा मानकों में ढील देना नहीं है। नई व्यवस्था में वार्षिक संयुक्त निरीक्षण, औचक निरीक्षण और साल में दो बार मॉक ड्रिल का प्रावधान रखा गया है, जिसमें पुलिस, दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) और सिनेमाघर प्रबंधन शामिल रहेंगे। खतरे की स्थिति में लाइसेंस निलंबित या रद्द करने की स्पष्ट व्यवस्था भी बनाई गई है। हर ज़िले में एक नोडल शिकायत निवारण अधिकारी भी नियुक्त होगा।

 

उपहार सिनेमा त्रासदी से जुड़ा है फैसला

 

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मुताबिक यह नई SOP सुप्रीम कोर्ट के उपहार सिनेमा त्रासदी (Uphaar Cinema Tragedy) से जुड़े निर्देशों के अनुपालन में जारी की गई है। उन्होंने बताया कि यह SOP मूल रूप से 2015 में ही फाइनल हो गई थी, लेकिन तत्कालीन आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने इसे लागू नहीं किया।

Sanjeev Kumar Mishra

Sanjeev Kumar Mishra

संजीव कुमार मिश्र 15 साल से श्रमजीवी पत्रकार हैं। 2009 में जर्नलिज्म में मास्टर करने के बाद राजधानी दिल्ली के प्रतिष्टित अखबारों, न्यूज चैनलों में काम किया। संजीव कुमार मिश्र के पत्रकारिता के करियर में जनसंदेश न्यूज चैनल, हरिभूमि अखबार, महामेधा अखबार, हमारा महानगर, डीएलए, दीयंगिस्तान और दैनिक जागरण महत्वपूर्ण पड़ाव है। दैनिक जागरण में साढ़े नौ साल की लंबी पारी खेली। दैनिक जागरण के राज्य ब्यूरो की सिटी टीम में कार्य करते हुए बाल आयोग, महिला आयोग से ना केवल संवेदनशील खबरें लिखीं बल्कि ट्रैफिक पुलिस, नगर निगम, स्थानी बाजारों पर भी मजबूत पकड़ बनाई। अन्ना आंदोलन, वसंत विहार सामूहिक दुष्कर्म कांड के दौरान संजीव कुमार मिश्र की कई खबरें चर्चा के केंद्रबिंदू में रहीं। इस समय Delhi Desk में सीनियर कंटेट एडिटर के रूप में कार्यरत।

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