दिल्ली के करोल बाग जोन में रेलवे ट्रैक के आसपास जमा सालों पुराने कचरे (Legacy Waste) को साफ करने के लिए भारतीय रेलवे ने दिल्ली नगर निगम (MCD) के करोल बाग जोन के उपायुक्त (Deputy Commissioner) दिलखुश मीणा की जमकर तारीफ की है। MCD और रेलवे के संयुक्त अभियान में पटरियों के किनारे से लगभग 6,333 मीट्रिक टन पुराना कचरा सफलतापूर्वक हटाया गया है।
रातभर में हटा कचरा
रेलवे पटरियों के किनारे पारंपरिक गाड़ियां और ट्रक ले जाना नामुमकिन था, लेकिन MCD और रेलवे की संयुक्त रणनीति ने इस मुश्किल काम को आसान बना दिया।
- BRN Wagons का इनोवेटिव इस्तेमाल: पारंपरिक रास्तों के न होने के कारण कचरा हटाने के लिए स्पेशल BRN वैगनों (ओपन रेलवे वैगन) का इस्तेमाल किया गया, जिससे कचरा सीधे लोड करके हटाया जा सका।
- नाइट ऑपरेशन और फील्ड सर्वे: रेल यातायात प्रभावित न हो, इसके लिए रात के समय सफाई अभियान चलाया गया। DC दिलखुश मीणा ने अधिकारियों के साथ खुद देर रात तक ऑन-ग्राउंड इंस्पेक्शन किया।
- अंतर-एजेंसी समन्वय (Inter-Agency Coordination): MCD और रेलवे के अधिकारियों के बीच लगातार को-ऑर्डिनेशन से 6,333 MT कचरा हटाया जा सका।
देश भर के रेलवे कॉरिडोर के लिए बनेगा मॉडल
भारतीय रेलवे ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे MCD और रेलवे के बीच अपनी तरह का पहला 'सहयोगात्मक मॉडल' (Collaborative Model) करार दिया है। अक्सर शहरों में रेलवे पटरियों के किनारे कचरा डंपिंग एक बड़ी समस्या बना रहता है क्योंकि अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) को लेकर एजेंसियां आमने-सामने होती हैं।
दिलखुश मीणा के इस मॉडल ने साबित किया है कि अगर दो सरकारी विभाग सही तालमेल से काम करें, तो जटिल से जटिल शहरी सफाई की समस्याओं को सुलझाया जा सकता है। इस मॉडल को अब देश के अन्य रेलवे कॉरिडोर्स में भी लागू करने की योजना है।
FAQ: इस प्रोजेक्ट से जुड़े मुख्य सवाल
Q1. MCD के किस अधिकारी को रेलवे ने सम्मानित/सराहा है?
उत्तर: MCD करोल बाग जोन के उपायुक्त (Deputy Commissioner) दिलखुश मीणा को रेलवे ट्रैक से 6,333 मीट्रिक टन कचरा हटाने के सफल नेतृत्व के लिए सराहा गया है।
Q2. रेलवे पटरियों के किनारे से कचरा हटाने के लिए किस तकनीक का इस्तेमाल किया गया?
उत्तर: सड़क मार्ग न होने के कारण कचरा सीधे खाली करने के लिए रेलवे के 'BRN Wagons' और नाइट-शिफ्ट सफाई अभियानों का इस्तेमाल किया गया।