CM Rekha Gupta का भू-माफियाओं पर सर्जिकल स्ट्राइक! दिल्ली में 'पावर ऑफ अटॉर्नी' (GPA) पर नया नियम लागू, अब सीधे जेल?
दिल्ली में अचल संपत्तियों की खरीद-बिक्री में बड़े पैमाने पर होने वाली स्टांप ड्यूटी चोरी, धोखाधड़ी और भू-माफियाओं के सिंडिकेट को ध्वस्त करने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री के सीधे निर्देश पर अब जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) के माध्यम से होने वाले संपत्ति संबंधी दस्तावेजों की स्क्रूटनी के लिए बेहद कड़े दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। राजधानी के सभी सब-रजिस्ट्रारों को इन आदेशों को तत्काल प्रभाव से लागू करने का फरमान सुनाया गया है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस फैसले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि कई मामलों में लोग मोटी स्टांप ड्यूटी बचाने के लिए दस्तावेजों को केवल ‘जीपीए’ का नाम दे देते हैं और नाममात्र के शुल्क पर रजिस्ट्री करा लेते हैं। जबकि, हकीकत में उन दस्तावेजों के अंदर संपत्ति की बिक्री, कब्जा सौंपने और मालिकाना हक ट्रांसफर करने जैसे खेल छिपे होते हैं। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि राजस्व की यह सीधे तौर पर चोरी है, जिसे अब दिल्ली में किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सब-रजिस्ट्रार करेंगे पैनी जांच; इन 4 बातों पर रहेगी नजर
नए नियमों के मुताबिक, अब दिल्ली का कोई भी सब-रजिस्ट्रार आंख बंद करके जीपीए की रजिस्ट्री नहीं कर सकेगा। पंजीकरण के लिए आने वाले हर दस्तावेज की गहराई से जांच होगी और देखा जाएगा कि:
- कहीं दस्तावेज में पिछले दरवाजे से किसी प्रकार के पैसे के लेन-देन (Cash/Bank Transaction) का जिक्र तो नहीं है?
- क्या कागजात में संपत्ति का कब्जा (Possession) सौंपने की बात छिपी है?
- क्या वह जीपीए अपरिवर्तनीय (Irrevocable) श्रेणी की है?
- क्या उसमें संपत्ति को बेचने, उपहार देने, ट्रांसफर करने या बंधक रखने का स्थायी हक दिया गया है?
यदि इनमें से एक भी बात पाई गई, तो उसे सामान्य जीपीए नहीं माना जाएगा।
'कलेक्टर ऑफ स्टांप' की मंजूरी जरूरी
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने नियमों को और सख्त करते हुए साफ कर दिया है कि माता-पिता, पति-पत्नी, बेटा, बेटी, भाई और बहन जैसे बेहद करीबी रक्त संबंधियों (Blood Relation) के अलावा किसी भी अन्य बाहरी व्यक्ति के पक्ष में की जाने वाली जीपीए को सब-रजिस्ट्रार सीधे रजिस्टर नहीं कर पाएंगे। ऐसे सभी संदिग्ध मामलों को उचित स्टांप शुल्क के निर्धारण के लिए अनिवार्य रूप से 'कलेक्टर ऑफ स्टांप' के पास भेजा जाएगा।
30 दिनों में फैसला और लापरवाही पर सीधे एक्शन
कलेक्टर ऑफ स्टांप को ऐसे भेजे गए हर मामले पर 30 दिनों के भीतर कारण सहित लिखित आदेश जारी करना होगा कि संबंधित दस्तावेज केवल एक सामान्य पावर ऑफ अटॉर्नी है या उस पर कन्वेयंस डीड (बिक्री पत्र) के समान पूरा स्टांप शुल्क वसूलना है। विशेष हालातों में यह समय 3 महीने तक बढ़ सकता है, लेकिन बिना उचित स्टांप शुल्क के भुगतान के ऐसी जीपीए रजिस्टर नहीं होगी।
मुख्यमंत्री ने सख्त लहजे में कहा कि यदि किसी सब-रजिस्ट्रार ने इन नियमों की अनदेखी की या बिना कलेक्टर को रेफर किए ऐसी किसी जीपीए की रजिस्ट्री कर दी, तो उस अधिकारी के खिलाफ तत्काल प्रभाव से सख्त अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
बनेगा ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम
पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए हर सब-रजिस्ट्रार दफ्तर में अब ऐसे मामलों का एक अलग से रजिस्टर मेंटेन होगा और इसकी मासिक रिपोर्ट सीधे सरकार को जाएगी। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने अगले एक महीने के भीतर इन सभी मामलों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए एक अत्याधुनिक 'ऑनलाइन ट्रैकिंग मैकेनिज्म' विकसित करने का आदेश भी दे दिया है। सरकार का यह कदम आम नागरिकों को भू-माफियाओं के जाल और त्रुटिपूर्ण दस्तावेजों की धोखाधड़ी से पूरी तरह सुरक्षित रखेगा।