Delhi Health Scam: 650 करोड़ के कथित घोटाले पर बीजेपी और आम आदमी पार्टी में आर-पार की जंग
दिल्ली की सियासत में इन दिनों भूचाल आया हुआ है। इस बार मुद्दा स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा है, जहां Delhi Health Scam (दिल्ली हेल्थ स्कैम) को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) आमने-सामने आ गई हैं। आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने हेल्थ सेक्टर में 650 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले का आरोप लगाते हुए सीधे तौर पर बीजेपी समर्थित लोगों को कटघरे में खड़ा किया है। वहीं, बीजेपी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए 'आप' पर पलटवार किया है।
दिल्ली हेल्थ स्कैम क्या है और इसमें क्या आरोप लगे हैं?
दिल्ली हेल्थ स्कैम दिल्ली के सरकारी अस्पतालों के लिए 448 एक्स-रे मशीनें खरीदने के टेंडर में हुई हेराफेरी का मामला है। AAP का आरोप है कि 45 करोड़ की मशीनें 148 करोड़ में खरीदकर 103 करोड़ का सीधा गबन किया गया और पूरे हेल्थ सेक्टर में 650 करोड़ का घोटाला हुआ।
टेंडर की शर्तों में हेरफेर और एक्स-रे मशीनों की खरीद का पूरा गणित
आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सरकारी अस्पतालों के लिए चिकित्सा उपकरण खरीदने की आड़ में जनता की गाढ़ी कमाई को लूटा गया है।
भारद्वाज के अनुसार, इस पूरे दिल्ली हेल्थ स्कैम के पीछे एक सोची-समझी साजिश है:
- शर्तों में बदलाव: बीजेपी सरकार से करीबी तौर पर जुड़े राजीव रंगीला नाम के एक व्यक्ति ने एक्स-रे मशीनें खरीदने के लिए टेंडर की शर्तों में जानबूझकर हेर-फेर की।
- दामों में भारी अंतर: जो एक्स-रे मशीनें दूसरे सरकारी विभागों को महज 10 लाख रुपये प्रति मशीन के हिसाब से सप्लाई की जाती हैं, उनके लिए दिल्ली में प्रति मशीन 33 लाख रुपये वसूले गए।
- करोड़ों का गबन: सरकार ने 148 करोड़ रुपये में कुल 448 एक्स-रे मशीनें खरीदीं। असल में इनकी कीमत 45 करोड़ रुपये होनी चाहिए थी, यानी सीधे तौर पर 103 करोड़ रुपये का गबन सिर्फ इस एक टेंडर में किया गया।
आंकड़ों की नज़र से समझें कथित घोटाला
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विवरण (Details) |
वास्तविक आंकड़े / आरोप |
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कुल एक्स-रे मशीनें |
448 मशीनें |
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अन्य विभागों में कीमत |
₹10 लाख प्रति मशीन |
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दिल्ली में वसूली गई कीमत |
₹33 लाख प्रति मशीन |
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मशीनों की कुल वास्तविक लागत |
₹45 करोड़ |
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भुगतान की गई कुल राशि |
₹148 करोड़ |
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एक्स-रे टेंडर में कथित गबन |
₹103 करोड़ |
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बीजेपी का तीखा पलटवार: "भ्रष्टाचार के मास्टर हमें न सिखाएं"
सौरभ भारद्वाज के इन तीखे आरोपों पर पलटवार करने में बीजेपी ने भी कतई देर नहीं की। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री हर्ष मलहोत्रा ने आम आदमी पार्टी पर करारा हमला बोला और इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया।
हर्ष मलहोत्रा ने 'आप' को घेरते हुए निम्नलिखित मुख्य बातें कहीं:
- इतिहास में पहली बार ACB जांच: दिल्ली सरकार के इतिहास में संभवतः यह पहली बार हुआ है कि स्वयं मुख्यमंत्री ने किसी भी तरह की गड़बड़ी की भनक लगते ही तुरंत एसीबी (ACB) जांच के आदेश दे दिए।
- भ्रष्टाचार के 'मास्टर': जो लोग पिछले 10 साल से दिल्ली की सत्ता पर काबिज हैं, वे खुद भ्रष्टाचार के 'मास्टर' और कट्टर भ्रष्टाचारी हैं। वे अपनी कमियां छिपाने के लिए अनर्गल आरोप लगा रहे हैं।
- जीरो टॉलरेंस की नीति: बीजेपी अध्यक्ष ने साफ किया कि चाहे केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार, हमारी भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति है।
"जो भी भ्रष्टाचार करता हुआ पाया जाएगा, उसे उसके अंजाम तक पहुंचाया जाएगा... विशेष तौर पर दिल्ली में भ्रष्टाचार को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।" - हर्ष मलहोत्रा, केंद्रीय मंत्री व बीजेपी अध्यक्ष
दिल्ली की राजनीति में गरमाया भ्रष्टाचार का मुद्दा
इस नए विवाद के बाद दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी बढ़ गई है। स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इतने बड़े घोटाले के आरोप लगना और उस पर दोनों मुख्य पार्टियों का इस तरह भिड़ना यह साफ करता है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा शांत नहीं होने वाला है। दिल्ली हेल्थ स्कैम की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
FAQs
प्र.1: दिल्ली हेल्थ स्कैम का मुख्य आरोपी कौन है?
उत्तर: आम आदमी पार्टी के मुताबिक, बीजेपी से करीबी तौर पर जुड़े राजीव रंगीला नाम के व्यक्ति ने एक्स-रे मशीन टेंडर की शर्तों में हेरफेर की है, जिसके चलते यह घोटाला हुआ।
प्र.2: एक्स-रे मशीनों की खरीद में कितने रुपये के गबन का आरोप है?
उत्तर: आरोप है कि ₹45 करोड़ की एक्स-रे मशीनों को ₹148 करोड़ में खरीदा गया, जिससे सीधे तौर पर ₹103 करोड़ का गबन हुआ।
प्र.3: इस मामले पर बीजेपी का क्या रुख है?
उत्तर: बीजेपी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री ने खुद इस मामले में गड़बड़ी पाते ही ACB जांच शुरू करवा दी है और सरकार की नीति भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की है।