तिहाड़ जेल में बंद स्वतंत्र भारद्वाज का 'गीता बनाम संविधान' पर दिया गया विवादित बयान इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है। जानिए जब उनसे पूछा गया कि देश में सर्वोपरि कौन है, तो उन्होंने क्या चौंकाने वाला जवाब दिया।
एससी-एसटी और पॉक्सो एक्ट में गिरफ्तार यूट्यूबर स्वतंत्र भारद्वाज को अदालत ने 14 दिन के लिए जेल भेज दिया है। स्वतंत्र ने अपनी गिरफ्तारी को अवैध घोषित करने संबंधी याचिका भी हाईकोर्ट में लगाई थी लेकिन वहां से भी उन्हें झटका लगा है। इस बीच सोशल मीडिया पर स्वतंत्र के पक्ष और विपक्ष में जमकर बहस हो रही है। एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें स्वतंत्र भारद्वाज से गीता या संविधान को लेकर सवाल पूछा गया है।
गीता या संविधान, सर्वोपरि कौन?
स्वतंत्र भारद्वाज का एक वीडियो एक्स पर वायरल है। जिसमें उनसे पूछा गया कि उनके लिए सर्वोपरि कौन है। श्रीमद्भगवत गीता या भारतीय संविधान। स्वतंत्र कहते हैं कि उनके लिए सबसे पहले गीता है और फिर संविधान। बकौल स्वतंत्र जन्म इंसान जन्म लेता है, थोड़ा समझदार होता है तो जो बात सबसे पहले बताई जाती है वो यही कि यह धरती मां है, गीता हमें धर्म सिखाती है। अच्छे-बुरे कर्मों का फल बताती है। कानून केवल डर पैदा करता है, लेकिन गीता हमें कर्मों का फल बताकर बुरे कर्म करने से रोकती है। गीता ना हो तो कर्मों के बारे में कौन बताए। इसलिए गीता सर्वोपरि है।
https://x.com/_kattar__hindu/status/2093642795840159784
Sanjeev Kumar Mishra
संजीव कुमार मिश्र 15 साल से श्रमजीवी पत्रकार हैं। 2009 में जर्नलिज्म में मास्टर करने के बाद राजधानी दिल्ली के प्रतिष्टित अखबारों, न्यूज चैनलों में काम किया। संजीव कुमार मिश्र के पत्रकारिता के करियर में जनसंदेश न्यूज चैनल, हरिभूमि अखबार, महामेधा अखबार, हमारा महानगर, डीएलए, दीयंगिस्तान और दैनिक जागरण महत्वपूर्ण पड़ाव है। दैनिक जागरण में साढ़े नौ साल की लंबी पारी खेली। दैनिक जागरण के राज्य ब्यूरो की सिटी टीम में कार्य करते हुए बाल आयोग, महिला आयोग से ना केवल संवेदनशील खबरें लिखीं बल्कि ट्रैफिक पुलिस, नगर निगम, स्थानी बाजारों पर भी मजबूत पकड़ बनाई। अन्ना आंदोलन, वसंत विहार सामूहिक दुष्कर्म कांड के दौरान संजीव कुमार मिश्र की कई खबरें चर्चा के केंद्रबिंदू में रहीं। इस समय Delhi Desk में सीनियर कंटेट एडिटर के रूप में कार्यरत।